12 पंचायतों के लोगों को हो रही परेशानी, अधिकारी के नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहने से ग्रामीणों को बार-बार लगाना पड़ रहा प्रखंड कार्यालय का चक्कर
पलामू: जिले के नौडीहा बाजार प्रखंड में पिछले छह माह से अधिक समय से प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) का पद अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रहा है। इस प्रखंड का प्रभार करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित हरिहरगंज के BDO को सौंपा गया है। इसके कारण नौडीहा बाजार प्रखंड की 12 पंचायतों के आम लोगों को विभिन्न प्रशासनिक कार्यों और समस्याओं के समाधान के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।
दो प्रखंडों की जिम्मेदारी, समय पर कामकाज पर असर
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ही अधिकारी के पास दो प्रखंडों की जिम्मेदारी होने के कारण दोनों जगह पर्याप्त समय देना मुश्किल हो रहा है। नौडीहा बाजार प्रखंड के ग्रामीणों को अपने काम के लिए अधिकारी का इंतजार करना पड़ता है। कई बार लोग दूर-दराज के गांवों से अपनी शिकायत और फरियाद लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन वहां अधिकारी के मौजूद नहीं रहने की जानकारी मिलती है। इसके बाद उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ता है।
स्थानीय सीओ को प्रभार देने की उठी मांग
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि नौडीहा बाजार अंचल में अंचल अधिकारी (CO) की तैनाती होने के बावजूद प्रखंड का अतिरिक्त प्रभार उन्हें क्यों नहीं दिया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि झारखंड सरकार के नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में BDO का प्रभार अंचल अधिकारी को दिया जा सकता है। हालांकि, इस मामले में संबंधित विभाग की ओर से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार, प्रखंड कार्यालय में अधिकारी की नियमित उपलब्धता नहीं होने से आम जनता को छोटे-बड़े प्रशासनिक कार्यों के लिए भी बार-बार चक्कर लगाना पड़ रहा है। दूर-दराज के इलाकों से आने वाले लोगों का समय और पैसा दोनों खर्च होता है। कई लोग अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन अधिकारी के नहीं मिलने पर उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने स्थायी व्यवस्था की मांग की
नौडीहा बाजार प्रखंड के लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि यहां BDO की नियमित व्यवस्था की जाए, ताकि 12 पंचायतों के विकास कार्यों और आम जनता से जुड़े मामलों का समय पर निपटारा हो सके। साथ ही, जब तक स्थायी पदस्थापना नहीं होती, तब तक ऐसा प्रभार सौंपने की व्यवस्था की जाए, जिससे प्रखंड कार्यालय में अधिकारी की उपलब्धता बनी रहे।
अब सवाल यह है कि छह माह से अधिक समय से चल रही इस व्यवस्था में विभाग कब बदलाव करेगा और नौडीहा बाजार प्रखंड के ग्रामीणों को नियमित प्रशासनिक सेवाएं कब मिल पाएंगी।


