सितंबर 2026 तक लागू था पुराना आदेश, अब एक साल के लिए बढ़ाई गई अवधि; H-1B वीजा धारकों में भारतीयों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा
नई दिल्ली। अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए H-1B वीजा से जुड़ी नई व्यवस्था चिंता बढ़ाने वाली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने H-1B वीजा पर लगाए गए 1 लाख डॉलर के शुल्क को एक और साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। यह शुल्क संबंधी आदेश पहले सितंबर 2026 तक लागू था।
H-1B वीजा पर क्यों बढ़ा शुल्क?
H-1B वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां दुनिया भर से उच्च कौशल वाले पेशेवरों को नौकरी देती हैं। आईटी सेक्टर में भी बड़ी संख्या में विदेशी पेशेवर इस वीजा के माध्यम से अमेरिका में काम करते हैं।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को कम लागत पर नियुक्त करती हैं, जिससे अमेरिकी कुशल कर्मचारियों के रोजगार पर असर पड़ता है। इसी आधार पर प्रशासन ने H-1B कार्यक्रम की व्यवस्था में बदलाव और जांच को सख्त करने की बात कही है।
भारतीयों पर क्यों पड़ेगा असर?
H-1B वीजा पाने वालों में भारतीय नागरिकों की बड़ी हिस्सेदारी है। समाचार में दिए गए USCIS आंकड़ों के अनुसार, 2024 में अमेरिका में H-1B वीजा वाले लोगों में 71 प्रतिशत भारतीय थे, जबकि चीन के नागरिकों की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत बताई गई है।
ऐसे में 1 लाख डॉलर का शुल्क भारतीय पेशेवरों और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय बोझ बन सकता है।
अदालत में चुनौती, मामला विचाराधीन
2025 में H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर शुल्क लगाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी। यह मामला दो अलग-अलग संघीय अदालतों में विचाराधीन बताया गया है।
यह शुल्क पहले से अमेरिका में छात्र वीजा पर रह रहे विदेशी नागरिकों को दिए गए वीजा पर लागू नहीं था। इसके अलावा नए H-1B वीजा के नवीनीकरण पर भी यह शुल्क लागू नहीं था।
H-1B चयन प्रक्रिया में भी बदलाव
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने H-1B वीजा की चयन प्रक्रिया में बदलाव की भी घोषणा की है। रिपोर्ट के अनुसार, H-1B रजिस्ट्रेशन की संख्या में करीब 92 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने H-1B आवेदनों की जांच को और सख्त करने का प्रावधान किया है। संबंधित अधिकारियों को यह भी देखने का निर्देश दिया गया है कि आवेदन करने वाला नियोक्ता उसी तरह के पदों पर काम कर रहे अमेरिकी कर्मचारियों की हाल में छंटनी कर चुका है या भविष्य में ऐसी योजना रखता है या नहीं।
ट्रंप प्रशासन ने कार्यक्रम के दुरुपयोग का लगाया आरोप
ट्रंप ने अपने कार्यकारी आदेश में कहा है कि H-1B कार्यक्रम का उद्देश्य अत्यधिक विशिष्ट कौशल वाले विदेशी अस्थायी कर्मचारियों की पहचान करना और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करना था। प्रशासन का आरोप है कि कुछ नियोक्ताओं, थर्ड-पार्टी स्टाफिंग समूहों और आउटसोर्सिंग कंपनियों ने इस कार्यक्रम का इस्तेमाल अमेरिकी कुशल कर्मचारियों को कम वेतन देने और उनकी नौकरियां प्रभावित करने के लिए किया।

