सुरगी जंगल के आजलगवा माइंस में कार्रवाई से मचा हड़कंप, छापेमारी के दौरान चालक फरार; अवैध खनन पर रोक लगाना वन विभाग के लिए चुनौती
कोडरमा। जिले के जंगलों में अवैध माइका खनन का कारोबार लगातार जारी रहने की सूचना के बीच वन विभाग और पुलिस ने सुरगी जंगल स्थित आजलगवा माइंस में छापेमारी की। इस कार्रवाई में खनन कार्य में इस्तेमाल किए जा रहे कंप्रेसरयुक्त ट्रैक्टर और जेसीबी मशीन को जब्त किया गया। वहीं, छापेमारी की भनक लगते ही मौके पर मौजूद चालक फरार हो गया। जब्त मशीनों को वन परिसर लाया गया है। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर जिले के वन क्षेत्रों में अवैध माइका खनन की गतिविधियों और उन पर प्रभावी रोक लगाने की चुनौती को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
गुप्त सूचना पर वन विभाग ने की छापेमारी
मिली जानकारी के अनुसार, कोडरमा वन क्षेत्र के रेंजर को सुरगी जंगल में अवैध माइका खनन किए जाने की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना मिलने के बाद वरीय अधिकारियों के निर्देश पर वन विभाग की टीम ने पुलिस के सहयोग से संबंधित स्थल पर छापेमारी की योजना बनाई। टीम जब आजलगवा माइंस पहुंची, तो वहां खनन कार्य में इस्तेमाल होने वाली मशीनें मिलीं।
कार्रवाई के दौरान टीम ने कंप्रेसरयुक्त ट्रैक्टर और जेसीबी को जब्त कर लिया। हालांकि, छापेमारी के दौरान चालक मौके से भागने में सफल रहा। इसके कारण तत्काल मौके पर उसकी पहचान और गिरफ्तारी नहीं हो सकी। विभाग अब इस मामले में संलिप्त लोगों की पहचान करने में जुटा है।
भारी मशीनों के इस्तेमाल से बढ़ी चिंता
वन क्षेत्र में माइका खनन के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी ने वन संपदा की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जंगलों में अनियंत्रित खनन से भूमि की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होने, वनस्पतियों को नुकसान पहुंचने और पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है।
ऐसे में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए केवल मशीनों को जब्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह पता लगाना भी जरूरी है कि खनन गतिविधियों के पीछे कौन लोग शामिल हैं और मशीनों का संचालन किसके निर्देश पर किया जा रहा था। मामले में आगे की जांच के दौरान इन पहलुओं पर जानकारी जुटाई जा सकती है।
वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की तैयारी
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मामले में संलिप्त लोगों को चिह्नित करने की प्रक्रिया जारी है। आरोपियों की पहचान होने के बाद वन अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जब्त मशीनों के स्वामित्व और उनके इस्तेमाल से संबंधित जानकारी भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
छापेमारी दल में वनकर्मी छत्रपति शिवाजी, दुर्गा महतो और सिकंदर कुमार समेत अन्य कर्मी शामिल थे। कार्रवाई में कोडरमा पुलिस की टीम ने भी सहयोग किया।
अवैध खनन के नेटवर्क तक पहुंचना बड़ी चुनौती
कोडरमा के वन क्षेत्रों में अवैध माइका खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए नियमित निगरानी और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई जरूरी है। जंगलों के भीतर खनन गतिविधियों की जानकारी मिलने पर त्वरित कार्रवाई करना विभाग के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि जब्त मशीनों के आधार पर संबंधित लोगों की पहचान हो और भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।
फिलहाल, सुरगी जंगल के आजलगवा माइंस में हुई छापेमारी के बाद वन विभाग की अगली कार्रवाई पर नजरें टिकी हैं। अब देखना होगा कि विभाग फरार चालक और अवैध खनन में कथित रूप से शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने में कितना सफल होता है तथा जिले के वन क्षेत्रों में इस गतिविधि पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।


