CAG Report Jharkhand: झारखंड सरकार के विभागों की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े किये हैं। मंगलवार को विधानसभा में पेश की गयी रिपोर्ट में राजस्व वसूली से लेकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और खर्च की निगरानी तक कई स्तरों पर खामियां सामने आयी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2025 तक ₹1,60,565.80 करोड़ से जुड़े उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित थे। यानी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद संबंधित विभाग यह प्रमाणित नहीं कर सके कि धन का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के अनुसार हुआ।
वहीं, परिवहन विभाग से जुड़े मामलों में ₹327.35 करोड़ के संभावित राजस्व पर असर पड़ने की बात सामने आयी है। मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, उत्पाद विभाग और GST व्यवस्था में भी ऑडिट के दौरान कई अनियमितताएं सामने आयी हैं।
₹1.60 लाख करोड़ खर्च, लेकिन उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित
CAG रिपोर्ट में झारखंड के वित्तीय प्रबंधन को लेकर सबसे बड़ा सवाल उपयोगिता प्रमाण-पत्र (Utilisation Certificate) को लेकर उठाया गया है।
मार्च 2025 तक ₹1,60,565.80 करोड़ से संबंधित उपयोगिता प्रमाण-पत्र लंबित थे। इसका मतलब है कि विभागों की ओर से खर्च की गयी राशि के उपयोग का प्रमाण निर्धारित समय तक उपलब्ध नहीं कराया गया था।
CAG ने इसे वित्तीय निगरानी और जवाबदेही के लिहाज से गंभीर स्थिति माना है।
मनरेगा में 50.21 लाख काम अधूरे
ग्रामीण विकास से जुड़ी मनरेगा योजना में भी ऑडिट के दौरान बड़ी खामियां सामने आयी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 से 2024 के दौरान प्रस्तावित कार्यों में केवल 27 फीसदी काम ही पूरे हो सके। करीब 49 फीसदी यानी 50.21 लाख काम अधूरे रह गये।
इन अधूरे कार्यों पर करीब ₹2,633 करोड़ खर्च किये जा चुके थे।
वहीं, मार्च 2025 तक मजदूरों की ₹321.84 करोड़ की मजदूरी लंबित थी। CAG ऑडिट में मनरेगा की राशि से वाहनों की मरम्मत कराने और आउटसोर्सिंग एजेंसियों के कर्मचारियों को भुगतान किये जाने के मामले भी सामने आये।
जल जीवन मिशन: 24% गांवों में एक भी नल कनेक्शन नहीं
जल जीवन मिशन की स्थिति को लेकर भी CAG ने सवाल उठाये हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के केवल 55 फीसदी ग्रामीण घरों तक नल से जल पहुंच पाया था, जबकि राष्ट्रीय औसत करीब 80 फीसदी बताया गया है।
वहीं, राज्य के 24 फीसदी गांवों में एक भी घर में नल का कनेक्शन नहीं मिला।
इससे योजना के लक्ष्य और जमीन पर उसके क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
PM आवास योजना में 6.32 लाख पात्र परिवार लक्ष्य से बाहर
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में लाभुकों के चयन और लक्ष्य निर्धारण में भी खामियां सामने आयी हैं।
CAG के अनुसार, झारखंड में 22.34 लाख पात्र परिवारों की पहचान की गयी थी, लेकिन केंद्र से केवल 16.02 लाख परिवारों का लक्ष्य मिला।
इस तरह 6.32 लाख पात्र परिवार योजना के लक्ष्य से बाहर रह गये। यह कुल पात्र परिवारों का करीब 28 फीसदी है।
दूसरी ओर, लाभुक सूची में 2.90 लाख अपात्र लोगों को शामिल किये जाने का भी मामला सामने आया। बाद में इन नामों को हटाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, योजना के तहत पूर्ण हो चुके करीब 8 फीसदी आवासों में शौचालय की सुविधा नहीं मिली।
18 साल से कम उम्र के 305 लोगों को गियर बाइक का लाइसेंस
परिवहन विभाग में भी नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है।
CAG ऑडिट में पांच जिलों में 18 वर्ष से कम उम्र के 305 आवेदकों को गियर वाली मोटरसाइकिल चलाने का लाइसेंस जारी किये जाने का पता चला।
रिपोर्ट के अनुसार, सारथी सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के कारण ऐसे आवेदकों को लाइसेंस जारी हुआ, जो निर्धारित उम्र सीमा के कारण गियर वाली बाइक चलाने के लिए पात्र नहीं थे।
₹327.35 करोड़ के राजस्व पर पड़ा असर
परिवहन विभाग में अस्थायी पंजीकरण यानी TR की वैधता छह महीने के बजाय केवल एक महीने रखे जाने के कारण ₹327.35 करोड़ के राजस्व पर असर पड़ने की बात CAG रिपोर्ट में कही गयी है।
ऑडिट में 6,640 ऐसे वाहन भी मिले, जिनका अस्थायी पंजीकरण होने के बाद स्थायी पंजीकरण नहीं कराया गया था।
इसके अलावा करीब 1.24 लाख वाहनों पर टैक्स बकाया मिला। इससे ₹11.24 करोड़ की संभावित राजस्व वसूली प्रभावित होने की बात सामने आयी।
शराब दुकानदारों पर ₹8.35 करोड़ का जुर्माना नहीं
उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली पर भी CAG ने सवाल उठाये हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, निर्धारित न्यूनतम स्टॉक नहीं रखने वाले शराब विक्रेताओं पर करीब ₹8.35 करोड़ का जुर्माना लगाया जाना था, लेकिन विभाग की ओर से निर्धारित दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गयी।
इससे सरकार को संभावित राजस्व की हानि हुई।
GST में ₹343.58 करोड़ की विसंगति
वाणिज्य कर विभाग में GST और ई-वे बिल के आंकड़ों की जांच के दौरान ₹343.58 करोड़ की कर देयता और ITC से जुड़ी विसंगतियां सामने आयी हैं।
कई मामलों में रिटर्न में घोषित कारोबार और ई-वे बिल के आंकड़ों में अंतर पाया गया।
CAG ने 23 बड़े करदाताओं के मामलों का भी उल्लेख किया। इन करदाताओं ने आयकर रिटर्न में ₹95.43 करोड़ की बिक्री दिखाई, लेकिन GST के तहत उनका पंजीकरण नहीं था।
रिपोर्ट के अनुसार, विभाग इन मामलों की समय पर पहचान कर आवश्यक कार्रवाई नहीं कर सका।
पूंजीगत व्यय में भी कमी
CAG रिपोर्ट में राज्य के पूंजीगत व्यय को लेकर भी चिंता जतायी गयी है।
वर्ष 2024-25 में पूंजीगत व्यय पिछले वर्ष की तुलना में ₹2,160 करोड़ कम हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, इसका असर परिसंपत्तियों के निर्माण और विकास योजनाओं की गति पर पड़ा।
CAG रिपोर्ट ने कई विभागों की व्यवस्था पर उठाये सवाल
कुल मिलाकर CAG की रिपोर्ट में परिवहन, वाणिज्य कर, ग्रामीण विकास, पेयजल एवं स्वच्छता और उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली में कई स्तरों पर खामियां चिह्नित की गयी हैं।
रिपोर्ट में सामने आये आंकड़े सरकारी योजनाओं की निगरानी, वित्तीय अनुशासन और विभागीय जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। अब विधानसभा में रिपोर्ट रखे जाने के बाद सरकार और संबंधित विभाग इन आपत्तियों पर क्या कार्रवाई करते हैं, इस पर नजर रहेगी।


