22-23 साल पहले बेकारबांध से हटाकर बरमुंडी में बसाए जाने का दावा, बिना वैकल्पिक व्यवस्था उजाड़ने पर आंदोलन और धनबाद बंद की चेतावनी
धनबाद। जिले के बरमुंडी स्थित खटाल क्षेत्र में भूमि मापी और जगह खाली कराने की कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। संभावित बेदखली से चिंतित खटालवासी शुक्रवार को उपायुक्त (डीसी) कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के समक्ष पुनर्वास की मांग रखी। प्रभावित परिवारों का कहना है कि यदि उन्हें बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के वहां से हटाया गया, तो करीब 200 परिवारों के सामने आवास का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। लोगों ने प्रशासन से पहले पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने और उसके बाद ही किसी तरह की बेदखली की कार्रवाई करने की मांग की है।
बेकारबांध से हटाकर बरमुंडी में बसाने का दावा
खटालवासियों के अनुसार, करीब 22-23 वर्ष पहले तत्कालीन जिला प्रशासन ने उन्हें बेकारबांध तालाब के आसपास से हटाकर बरमुंडी में बसाया था। प्रभावित लोगों का दावा है कि उस समय क्षेत्र में जंगल जैसा माहौल था। उन्होंने अपनी मेहनत से झोपड़ियां बनाईं और धीरे-धीरे वहां परिवारों के साथ रहना शुरू किया। समय के साथ इलाके का विकास हुआ और आसपास बड़े-बड़े शोरूम तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थापित हो गए।
लोगों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक इसी जगह पर रहकर अपना जीवन गुजारा है। अब खटाल खाली कराने और भूमि मापी की कार्रवाई की जानकारी मिलने से उनके बीच चिंता बढ़ गई है। उन्हें आशंका है कि प्रशासन की कार्रवाई के कारण उनके घर और आजीविका दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
पुराने आवंटन के दस्तावेज होने का दावा
प्रभावित परिवारों का कहना है कि जब उन्हें बरमुंडी में बसाया गया था, तब प्रशासन की ओर से आवंटन से संबंधित कागजात और अन्य दस्तावेज दिए गए थे। खटालवासी अब इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अपना पक्ष प्रशासन के सामने रखना चाहते हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को पुराने रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित भूमि पर उनके रहने तथा खटाल संचालन की कानूनी स्थिति क्या है।
हालांकि, पुराने आवंटन से जुड़े दस्तावेजों की वैधता और वर्तमान भूमि की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में प्रशासनिक रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पहले पुनर्वास, फिर बेदखली की कार्रवाई की मांग
डीसी कार्यालय पहुंचे खटालवासियों ने मांग की कि यदि संबंधित जमीन को खाली कराना आवश्यक है, तो पहले सभी प्रभावित परिवारों के लिए आवास या वैकल्पिक कॉलोनी की व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि अचानक बेघर होने से बच्चों की पढ़ाई, परिवारों की आजीविका और दैनिक जीवन पर गंभीर असर पड़ेगा।
प्रभावित लोगों के अनुसार, कई परिवार लंबे समय से खटाल संचालन और उससे जुड़े कामकाज के माध्यम से अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। ऐसे में बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के हटाए जाने से उनके सामने रहने के साथ-साथ रोजगार का संकट भी खड़ा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मामले का समाधान निकालने की अपील की है।
बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की भी जांच करने की मांग
खटालवासियों ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में निष्पक्षता बरतने की मांग भी उठाई है। उनका आरोप है कि यदि सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाया जा रहा है, तो आसपास के बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से जुड़े मामलों की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि कार्रवाई सभी संबंधित क्षेत्रों में समान रूप से लागू होनी चाहिए, ताकि किसी के साथ भेदभाव न हो।
हालांकि, बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अतिक्रमण के आरोपों की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। इस संबंध में संबंधित भूमि के रिकॉर्ड और प्रशासनिक जांच के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
आंदोलन और धनबाद बंद की चेतावनी
खटालवासियों ने स्पष्ट किया कि वे पुनर्वास की मांग को लेकर अपनी आवाज उठाते रहेंगे। उनका कहना है कि यदि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के घरों और खटालों को हटाने की कार्रवाई की गई, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। प्रभावित लोगों ने जरूरत पड़ने पर धनबाद बंद का आह्वान करने की भी चेतावनी दी है।
फिलहाल, करीब 200 परिवारों की चिंता पुनर्वास, पुराने आवंटन से जुड़े दस्तावेजों की जांच और बेदखली की कार्रवाई को लेकर बनी हुई है। अब इस मामले में जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे उठाए जाने वाले कदमों पर लोगों की नजरें टिकी हैं। प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही भूमि की स्थिति, आवंटन की वैधता और पुनर्वास की संभावनाओं को लेकर तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।


