नई दिल्ली/डेस्क : देशभर की महिलाओं के लिए ऐतिहासिक फैसला लेते हुए केंद्र सरकार ने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को लागू कर दिया है। संसद में देर रात तक चली बहस के बाद आधी रात को नोटिफिकेशन जारी किया गया, जिसके साथ ही 17 अप्रैल 2026 से संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने का रास्ता साफ हो गया है।
यह प्रावधान संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत लागू किया गया है, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से भी जाना जाता है।
परिसीमन के बाद ही मिलेगा वास्तविक आरक्षण
केंद्रीय कानून मंत्रालय के अनुसार, कानून लागू होने के बावजूद महिलाओं को तुरंत आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। इसके लिए पहले नई जनगणना के आधार पर संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन (डिलिमिटेशन) किया जाएगा। इसके बाद ही सीटों का आरक्षण प्रभावी होगा।
लोकसभा सीटों में बड़ा बदलाव संभव
इस कानून के लागू होने के साथ ही लोकसभा सीटों की संख्या में भी बड़ा इजाफा प्रस्तावित है। वर्ष 2029 तक लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर लगभग 850 तक की जा सकती हैं।
- इनमें 35 सीटें केंद्रशासित प्रदेशों के लिए होंगी
- शेष सीटें राज्यों के लिए निर्धारित की जाएंगी
- नई व्यवस्था में सरकार बनाने के लिए 400+ सीटों का बहुमत आवश्यक होगा
लंबी बहस के बाद लागू हुआ कानून
संसद के विशेष सत्र में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच 15 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई। संविधान संशोधन, परिसीमन और केंद्रशासित प्रदेश से जुड़े तीन महत्वपूर्ण बिल पेश किए गए, जिन पर व्यापक बहस के बाद यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया।
प्रधानमंत्री Narendra Modi का बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले को देश के इतिहास का “सबसे बेहतरीन निर्णय” बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम 25-30 साल पहले उठाया जाना चाहिए था, लेकिन अब इसे लागू कर देश ने एक नई दिशा में कदम बढ़ाया है।
क्या बदलेगा अब?
- संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी
- राजनीतिक दलों को महिला उम्मीदवारों को अधिक अवसर देने होंगे
- नीति-निर्माण में महिलाओं की भूमिका मजबूत होगी
कुल मिलाकर, 33% महिला आरक्षण का यह निर्णय भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले वर्षों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।


