रांची : झारखंड के खनन विभाग में एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों ने हलचल मचा दी है। उपनिदेशक संजीव कुमार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में आय से अधिक संपत्ति और कथित भ्रष्टाचार को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत सेण्टर फॉर आरटीआई के अध्यक्ष पंकज यादव ने की है, जिसमें कई जिलों में पदस्थापन के दौरान गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।
पद बड़ा, आरोप उससे भी बड़े
वर्तमान में उपनिदेशक, खान और अतिरिक्त निदेशक माइंस, रांची का प्रभार संभाल रहे संजीव कुमार पहले भी विभागीय जांच का सामना कर चुके हैं। हालांकि उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है, लेकिन अब नए आरोपों ने उस जांच की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
RTI संस्था का दावा: ‘करोड़ों की संपत्ति, सिस्टम को नुकसान’
शिकायत के अनुसार, पलामू, गढ़वा और रांची में DMO रहते हुए संजीव कुमार ने कथित रूप से भ्रष्ट गतिविधियों के जरिए करोड़ों की संपत्ति अर्जित की।
आरोप यह भी है कि उन्होंने निजी लाभ के लिए सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया और अवैध खनन नेटवर्क को बढ़ावा दिया।
गढ़वा में ‘मिलीभगत’ से करोड़ों की कमाई का आरोप
शिकायत में गढ़वा कार्यकाल को सबसे विवादित बताया गया है। आरोप है कि एक यार्ड संचालक के साथ मिलकर दो करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की गई।
इसके अलावा, अवैध खनन में पकड़े गए वाहनों को पैसे लेकर छोड़ने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
पलामू और रांची: अवैध खनन से क्रशर तक कनेक्शन?
RTI संस्था का दावा है कि पलामू में पत्थर माफियाओं के साथ मिलकर जंगलों से अवैध खनन कराया गया।
वहीं, रांची में अपने रिश्तेदारों के नाम पर पत्थर क्रशर चलाने का आरोप भी लगाया गया है, जो हितों के टकराव (Conflict of Interest) का गंभीर मामला बन सकता है।
पुरानी जांच भी घेरे में, ‘क्लीन चिट’ पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल उस विभागीय जांच पर उठ रहा है, जिसमें संजीव कुमार को पहले क्लीन चिट मिल चुकी है।
शिकायत में मांग की गई है कि उस जांच में शामिल अधिकारियों की भूमिका की भी ACB जांच करे।
ACB के सामने चुनौती: क्या खुलेगा पूरा नेटवर्क?
सेण्टर फॉर आरटीआई का दावा है कि उनके पास ठोस दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं। संस्था ने ACB से निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है।
मामले की अहम बातें (Key Points)
- खनन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप
- कई जिलों में कार्यकाल के दौरान अनियमितताओं का दावा
- करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने का आरोप
- पूर्व जांच की निष्पक्षता पर उठे सवाल
- ACB जांच की मांग से बढ़ी राजनीतिक-प्रशासनिक हलचल
