पटना/डेस्क : बिहार की नई सरकार के गठन के साथ ही शराबबंदी कानून को लेकर चल रही अटकलों पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ रुख अपना लिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि राज्य में शराबबंदी कानून जारी रहेगा और इसमें किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। उनके इस बयान के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
शराबबंदी पर कोई समझौता नहीं
शराबबंदी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति आगे भी सख्ती से लागू रहेगी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फैसले की सराहना करते हुए इसे एक सामाजिक सुधार की दिशा में अहम कदम बताया। साथ ही कहा कि इस नीति को नरेंद्र मोदी का भी समर्थन प्राप्त है, इसलिए इसे जारी रखा जाएगा।
जीरो टॉलरेंस और सख्त प्रशासन
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य एजेंडा सुशासन और पारदर्शिता है। भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति पहले से अधिक सख्ती से लागू की जाएगी। इसकी निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से होगी, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी को तुरंत रोका जा सके।
प्रशासनिक व्यवस्था पर कड़ी नजर
नई सरकार अब ब्लॉक, अंचल और थाना स्तर तक प्रशासनिक कामकाज की नियमित समीक्षा करेगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर बड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि आम जनता को सरकारी कार्यों में देरी और परेशानी का सामना न करना पड़े।
5 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य
राज्य में विकास को गति देने के लिए सरकार ने 15 नवंबर तक 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अकादमिक कैलेंडर को सख्ती से लागू करने की बात कही गई है, ताकि स्कूल-कॉलेज समय पर संचालित हो सकें और पढ़ाई का माहौल बेहतर बने।
विपक्ष पर निशाना, जांच अभियान की घोषणा
राजनीतिक स्थिति पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि विपक्ष में जल्द ही टूट देखने को मिल सकती है। साथ ही उन्होंने बताया कि राज्य में 22 लाख संदिग्ध नामों की पहचान के लिए विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा।
आर्थिक स्थिति पर सफाई
वित्तीय संकट की खबरों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह स्थिर है और विकास कार्यों में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी।


