नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
14 अप्रैल का दिन भारत के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के लिए सम्मान, समानता और न्याय का प्रतीक है। इसी दिन Bhimrao Ramji Ambedkar का जन्म हुआ था, जिन्हें देशभर में श्रद्धा और गर्व के साथ याद किया जाता है। उनकी जयंती के अवसर पर पूरे देश में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
1891 में मध्य प्रदेश के महू में एक दलित परिवार में जन्मे Bhimrao Ramji Ambedkar ने बचपन से ही सामाजिक भेदभाव और छुआछूत का सामना किया। लेकिन कठिन परिस्थितियों ने उन्हें कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया। उन्होंने अपना पूरा जीवन दलितों, वंचितों और शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया।
शिक्षा और अधिकारों के लिए प्रेरणास्रोत
बाबा साहेब ने समाज के सबसे निचले तबके के लोगों को शिक्षा और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया। जब जातिवाद गहराई तक जकड़ा हुआ था, तब उन्होंने अपनी विद्वत्ता और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर सामाजिक बदलाव की नींव रखी। वे केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक, अर्थशास्त्री और न्यायविद भी थे। उन्होंने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को लोकतंत्र का आधार बताया।
देशभर में कार्यक्रम, नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
डॉ. अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। Droupadi Murmu, Narendra Modi, C. P. Radhakrishnan और Mallikarjun Kharge समेत कई प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। संसद परिसर स्थित अंबेडकर प्रेरणा स्थल पर भी नेताओं ने पहुंचकर नमन किया।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का संदेश
राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने अपने संदेश में डॉ. अंबेडकर को महान समाज सुधारक और समतावादी विचारक बताते हुए कहा कि उनका जीवन वंचितों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। वहीं प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा कि बाबा साहेब के विचार और उनका संघर्ष आज भी देश को न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
समानता और न्याय का संदेश आज भी प्रासंगिक
आज भी Bhimrao Ramji Ambedkar के विचार समाज को दिशा देते हैं। उनकी सोच और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।

