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झारखंड में ट्रेजरी घोटाले का विस्फोट: बोकारो के बाद हजारीबाग से ₹15.41 करोड़ की लूट

ट्रेजरी घोटाले का जाल गहराया: बोकारो के बाद हजारीबाग में ₹15.41 करोड़ की अवैध निकासी

11 साल से चल रही थी वेतन में हेराफेरी, सरकार ने 33 ट्रेजरी की जांच के दिए आदेश

हजारीबाग/रांची, ब्यूरो रिपोर्ट:
झारखंड में ट्रेजरी घोटाले का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। बोकारो में ₹3.15 करोड़ की अवैध निकासी के खुलासे के बाद अब Hazaribagh से ₹15.41 करोड़ की भारी वित्तीय गड़बड़ी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कर्मचारियों को तय वेतन से कहीं अधिक भुगतान किया गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हुआ।


क्या है पूरा मामला?

  • पुलिस विभाग के वेतन मद से जुड़ी गड़बड़ी
  • करीब 11 वर्षों से चल रहा था फर्जी भुगतान
  • प्रारंभिक जांच में ₹15 करोड़ से अधिक की हेराफेरी
  • तीन कर्मियों — शंभु, धीरेंद्र और पंकज से पूछताछ

सूत्रों के मुताबिक, वेतन भुगतान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद यह पूरा मामला उजागर हुआ।


🧾 जांच के लिए बनी विशेष टीम

जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार सदस्यीय जांच टीम गठित की है। यह टीम जिला कोषागार की फाइलों और भुगतान रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है।


🛑 ऐसे हुआ घोटाला

  • सेवानिवृत्त या गैर-कार्यरत कर्मियों को भी वेतन भुगतान
  • तय वेतन का सत्यापन किए बिना अधिक राशि जारी
  • एक ही मोबाइल नंबर पर बिल क्लर्क और निकासी पदाधिकारी का OTP
  • पंजी मिलान (रजिस्टर वेरिफिकेशन) के बिना भुगतान

🗣️ सरकार सख्त, वित्त मंत्री का बड़ा बयान

राज्य के वित्त मंत्री Radhakrishna Kishore ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इस तरह की वित्तीय अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण पर मुख्यमंत्री Hemant Soren से चर्चा कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


🔍 अब राज्यभर में होगी जांच

सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्य की सभी 33 ट्रेजरी और सब-ट्रेजरी में निकासी की व्यापक जांच कराने का आदेश दिया है। जांच राज्य सरकार की एजेंसी द्वारा ही कराई जाएगी।


📩 सभी जिलों को अलर्ट जारी

मामला सामने आने के बाद सचिव प्रशांत कुमार ने सभी विभागाध्यक्षों, प्रमंडलीय आयुक्तों, उपायुक्तों, एसपी और एसएसपी को पत्र जारी कर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।


🧨 बड़ा सवाल

लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने सरकारी वित्तीय व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है।

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