नई दिल्ली/ज्योतिष डेस्क: ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति के कारण आज 13 अप्रैल, सोमवार से पंचक की शुरुआत हो गई है। सोमवार से आरंभ होने के कारण इसे राज पंचक कहा जाता है, जिसे सामान्य पंचक की तुलना में अपेक्षाकृत शुभ माना जाता है। हालांकि, इस दौरान कुछ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करता है और धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद व रेवती नक्षत्रों में स्थित होता है, तब पंचक लगता है। यह समय सावधानी बरतने का माना जाता है।
कब तक रहेगा राज पंचक?
13 अप्रैल 2026, सोमवार को सुबह 3:44 बजे से शुरू हुआ यह पंचक
17 अप्रैल 2026, शुक्रवार को दोपहर 12:02 बजे समाप्त होगा।
दक्षिण दिशा की यात्रा से बचें
ज्योतिष मान्यता के अनुसार दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है। पंचक के दौरान इस दिशा में यात्रा करने से दुर्घटना या अशुभ घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए इससे बचना चाहिए।
घर निर्माण से जुड़े काम टालें
अगर आप घर बनवा रहे हैं तो पंचक के दौरान छत डालने का काम रोक देना बेहतर माना जाता है। मान्यता है कि इस समय ऐसा करने से घर में कलह और आर्थिक नुकसान हो सकता है। साथ ही ईंधन इकट्ठा करने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है।
पलंग-चारपाई खरीदने से करें परहेज
पंचक में चारपाई बनवाना या पलंग खरीदना वर्जित माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। राज पंचक में भी इन कार्यों को टालना ही उचित बताया गया है।
अंतिम संस्कार में रखें विशेष ध्यान
यदि पंचक के दौरान किसी व्यक्ति का निधन होता है, तो अंतिम संस्कार के समय विशेष विधि अपनाई जाती है। मान्यता है कि शव के साथ कुश के पांच पुतले बनाकर संस्कार करना चाहिए, अन्यथा पंचक दोष लग सकता है।
सावधानी ही सुरक्षा:
हालांकि राज पंचक को अपेक्षाकृत शुभ माना जाता है, फिर भी इन पांच दिनों में सतर्क रहना और परंपराओं का पालन करना बेहतर माना जाता है।


