रांची: पाकुड़ में पैनम कोल माइंस कंपनी के कथित अवैध कोयला खनन को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने राज्य सरकार के शपथ पत्र पर नाराजगी जताई और कई सवालों के संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर सरकार को नया, विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने पूछा कि डिविजनल कमिश्नर की जांच रिपोर्ट पर सरकार ने क्या कार्रवाई की है। शपथ पत्र में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं था।पूर्व में दाखिल शपथ पत्र के अनुसार पाकुड़ के डीसी को रिपोर्ट के आधार पर शोकाज किया गया था। इस पर कोर्ट ने सवाल किया—“शोकाज नोटिस के बाद क्या कार्रवाई हुई?” लेकिन सरकार की ओर से इसका कोई ठोस जवाब नहीं दिया जा सका।
साथ ही अदालत ने यह भी पाया कि कंपनी द्वारा CSR मद में खर्च की गई राशि का पूरा और सही विवरण शपथ पत्र में उपलब्ध नहीं कराया गया है। जनहित याचिका अधिवक्ता राम सुभग सिंह ने दायर की है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2015 में पैनम कोल माइंस कंपनी को पाकुड़ और दुमका जिले में कोयला खनन का लीज मिला था, लेकिन कंपनी ने लीज सीमा से अधिक खनन किया, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ।
याचिका में कहा गया है कि मामले की जांच तो हुई, लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं की गई। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक सरकार को सभी बिंदुओं पर स्पष्ट और विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।


