
रांची। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी नगर निकाय चुनाव में मेयर पद के लिए अपने समर्थित प्रत्याशियों के नाम तय कर लिए हैं। चुनाव निर्दलीय आधार पर होने के कारण पार्टी औपचारिक रूप से उम्मीदवार घोषित नहीं कर रही है, लेकिन अंदरखाने जिन प्रत्याशियों को समर्थन दिया गया है, उनकी सूची सामने आ गई है।
भाजपा की ओर से रांची से रोशनी खलको, देवघर से रीता चौरसिया, पलामू से अरुणा शंकर, धनबाद से संजीव अग्रवाल और चास से अविनाश कुमार को मेयर पद के लिए समर्थन दिया गया है। वहीं हजारीबाग से सुदेश चंद्रवंशी और मानगो से संध्या सिंह को भी पार्टी का समर्थन प्राप्त है।
मंगलवार को प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता नगर निगम क्षेत्रों में जाकर इन प्रत्याशियों के समर्थन की औपचारिक घोषणा करेंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार समर्थित उम्मीदवारों को इसकी जानकारी पहले ही दे दी गई है। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के वरिष्ठ नेता और जिलाध्यक्ष सक्रिय रूप से मैदान में उतरेंगे।
मेयर प्रत्याशियों के चयन के लिए केंद्रीय नेतृत्व सक्रिय
मेयर पद के लिए नाम तय करने की प्रक्रिया में केंद्रीय नेतृत्व भी सक्रिय रहा। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह और रेखा वर्मा इस सिलसिले में रांची पहुंचे। सोमवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में हुई अहम बैठक में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
बैठक में चुनावी जीत की संभावनाओं और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर विस्तृत चर्चा की गई। अरुण सिंह ने नगर निकाय चुनावों को गंभीरता से लेते हुए संगठित और आक्रामक अभियान चलाने का निर्देश दिया। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद वरिष्ठ नेताओं के क्षेत्रीय दौरे भी प्रस्तावित हैं।
भाजपा समर्थित मेयर प्रत्याशियों की सूची
आदित्यपुर – प्रभाषिणी कंडुलिया
देवघर – रीता चौरसिया
चास – अविनाश कुमार
रांची – रोशनी खलको
धनबाद – संजीव अग्रवाल
मानगो – संध्या सिंह
गिरिडीह – डॉ. शैलेंद्र चौधरी
पलामू – अरुणा शंकर
हजारीबाग – सुदेश चंद्रवंशी
बागी उम्मीदवार बन सकते हैं चुनौतीइस सूची के सामने आने के बाद कई नगर निगम क्षेत्रों में राजनीतिक बवाल की आशंका जताई जा रही है। विशेष रूप से धनबाद में स्थिति दिलचस्प है, जहां निवर्तमान मेयर शेखर अग्रवाल ने भी नामांकन दाखिल कर दिया है। ऐसे में बागी उम्मीदवारों पर नियंत्रण रखना भाजपा के लिए आने वाले दिनों में एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
