हजारीबाग : सेंट्रल जेल (जेपी कारा) में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने रविवार को जेल अधीक्षक जितेंद्र कुमार को गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते हिरासत में ले लिया। विभाग की अनुशंसा पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही जेल का प्रभार हजारीबाग उपायुक्त सह उप निर्वाचन पदाधिकारी मां देव प्रिया को सौंप दिया गया है, जिन्होंने सोमवार को स्वत: प्रभार ग्रहण कर लिया। इससे पहले, एक सप्ताह पूर्व चर्चित भूमि घोटाले के मामले में जेलर समेत 12 कर्मियों और कक्षपालों को निलंबित कर दिया गया था, जबकि अनुबंध पर कार्यरत छह सुरक्षाकर्मियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। यह मामला आईएएस अधिकारी विनय चौबे और जमीन कारोबारी विनय सिंह से जुड़ा हुआ है, जिन्हें एसीबी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
अवैध सुविधाओं के बदले ‘नजराना’
जांच में सामने आया है कि जेल अधीक्षक ने विनय सिंह को जेल में विशेष सुविधाएं मुहैया कराने के एवज में नकद और मोबाइल की मांग की थी। रविवार सुबह लगभग 11 बजे एसीबी की टीम ने जितेंद्र कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। सूत्रों के अनुसार, एसीबी को जेल में हुए भ्रष्टाचार से जुड़े कई अहम दस्तावेज, रिकॉर्ड और साक्ष्य मिले हैं। इनमें उन कैदियों की मेहनताना से जुड़ी गड़बड़ियों का भी उल्लेख है, जिन्हें सख्त सजा मिली हुई थी।
सुरक्षा कड़ी, मुलाकात पर रोक
घटना के बाद जेल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त कर दी गई है। जेल में प्रवेश करने वालों की सघन तलाशी ली जा रही है और आपूर्ति की जाने वाली हर वस्तु की स्कैनिंग की जा रही है। विनय सिंह के परिवार के सदस्यों — उनके बेटे और भाई — को भी बंदी से मिलने की अनुमति नहीं दी गई है।
भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने वाला पूर्व बंदी
जानकारी के अनुसार, दो महीने पहले हत्या के मामले में रिहा हुआ एक पूर्व बंदी ही इस पूरे भ्रष्टाचार को उजागर करने में अहम भूमिका निभाई। उसने एसीबी को ईमेल भेजकर जेल के भीतर मोबाइल, आपत्तिजनक वस्तुओं की बिक्री, वसूली और यहां तक कि जेल की सामग्री (लोहा) बेचने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।
बड़े खुलासे की उम्मीद
एसीबी द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के बाद इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। इस कार्रवाई को हजारीबाग सेंट्रल जेल में व्याप्त गहरे भ्रष्टाचार के जाल को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस बहुचर्चित मामले से जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं, जिससे झारखंड के कारा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।


