रांची : राजधानी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) में अब निजी अस्पताल मनमाने ढंग से मरीजों को रेफर नहीं कर पाएंगे। रिम्स प्रबंधन ने इस पर सख्ती बरतने की तैयारी शुरू कर दी है।निदेशक डॉ. राजकुमार ने बताया कि जल्द ही एक नई नीति लागू होगी।
इसके तहत निजी अस्पतालों को मरीज रेफर करने से पहले तीन सवालों के लिखित जवाब देने होंगे—
1️⃣ मरीज किस हालत में आया और क्या इलाज किया गया।
2️⃣ मौजूदा स्थिति क्या है और रेफर करने की जरूरत क्यों पड़ी।
3️⃣ गंभीर हालत या सर्जरी के दौरान क्या उपचार हुआ और अब स्थानांतरण क्यों जरूरी है।
इन सवालों के जवाब और निदेशक से समन्वय के बिना मरीज की भर्ती नहीं की जाएगी। डॉ. राजकुमार ने कहा, “अब यह सिलसिला खत्म होगा कि निजी अस्पताल लाखों रुपये लेकर मरीज की हालत बिगाड़ दें और रिम्स को ‘डेथ ट्रांसफर स्टेशन’ बना दें। ”उन्होंने बताया कि हाल ही में बोकारो से 30 लाख रुपये इलाज में खर्च कराने के बाद एक गंभीर मरीज को रेफर किया गया, जबकि रांची के एक निजी अस्पताल ने भी अधमरी हालत में मरीज भेजा।
नई नीति को अगली गवर्निंग बॉडी बैठक (12 नवंबर) में एजेंडे के रूप में रखा जाएगा। मंजूरी के बाद इसे लागू किया जाएगा। रिम्स में हर दिन करीब 50 से अधिक रेफर मरीज पहुंचते हैं, जिनमें लगभग 30% की स्थिति बेहद गंभीर होती है।
इससे न केवल डॉक्टरों पर दबाव बढ़ता है, बल्कि अन्य मरीजों के इलाज पर भी असर पड़ता है।डॉ. राजकुमार ने स्पष्ट कहा, “रिम्स किसी निजी अस्पताल का बैकअप सेंटर नहीं है, यह राज्य का सबसे बड़ा उपचार संस्थान है।”


