पलामू: मेदिनीनगर शहर में तेजी से खड़े हो रहे कई बड़े-बड़े मॉल और कॉम्प्लेक्स अब सवालों के घेरे में हैं। नियम के अनुसार किसी भी बड़े व्यावसायिक भवन को खड़ा करने से पहले नगर निगम से नक्शा पास कराना ज़रूरी होता है, लेकिन हकीकत यह है कि ज़्यादातर निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे के ही धड़ल्ले से किए जा रहे हैं।जानकार बताते हैं कि बिना नक्शा पास भवन खड़े होने से न केवल सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती है, बल्कि भविष्य में दुर्घटना और विवाद की आशंका भी बनी रहती है। दूसरी ओर, नगर निगम की खामोशी यह संकेत देती है कि या तो भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है या फिर प्रशासनिक उदासीनता हावी है।स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले में जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना होगा कि नगर निगम कब जागता है और नियम तोड़कर खड़े हो रहे इन अवैध मॉल्स पर कार्रवाई होती है या नहीं।
नियमों की खुली अनदेखी
भवन निर्माण कानूनों के तहत किसी भी व्यावसायिक परिसर को खड़ा करने से पहले नगर निगम की स्वीकृति और नक्शा पास कराना अनिवार्य है। इसमें भवन की सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था, पार्किंग की सुविधा और सड़क पर पड़ने वाले दबाव जैसे अहम बिंदुओं की जांच होती है। लेकिन पलामू में इन नियमों को दरकिनार कर खुलेआम अवैध निर्माण किया जा रहा है।
निगम की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम के अधिकारी सब जानते हुए भी कार्रवाई नहीं करते। मॉल के मालिकों और बिल्डरों से मिलीभगत कर निगम के कुछ अफसर आंख मूंदे बैठे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि इतने बड़े-बड़े निर्माण बिना सत्ता या सिस्टम की छत्रछाया के कैसे संभव हैं?
संभावित खतरे
• बिना नक्शा पास मॉल्स में आगजनी और हादसे का बड़ा खतरा।
• सुरक्षा मानकों की अनदेखी से कभी भी बड़ी जनहानि की आशंका।
• सड़क और यातायात पर बढ़ता दबाव, पार्किंग व्यवस्था नदारद।
• अवैध निर्माण से राजस्व का नुकसान, सरकारी खजाना खाली।
बड़ा सवाल
क्या नगर निगम में भ्रष्टाचार और राजनीतिक दबाव के कारण ये मॉल्स खड़े हो रहे हैं? या फिर यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है? जवाब चाहे जो भी हो, लेकिन सच यह है कि नियम तोड़कर खड़ा हुआ हर ईंट आम जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ है।


