
संजीत यादव
रांची/पाकुड़ | झारखंड में पत्थर खनन पट्टों की स्वीकृति प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की परतें अब एक-एक कर खुलने लगी हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), रांची ने इस मामले में प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज करने के लिए राज्य सरकार के कैबिनेट सचिवालय एवं निगरानी विभाग से आधिकारिक अनुमति मांगी है। यदि अनुमति मिलती है, तो यह झारखंड के खनन सेक्टर में छुपे एक मेगा घोटाले की जांच का दरवाज़ा खोल देगा।
आरोप: फर्जी दस्तावेज़ों से ली गई पर्यावरणीय मंज़ूरी
यह गंभीर मामला सोशल एक्टिविस्ट पंकज कुमार यादव द्वारा 25 फरवरी 2025 को दायर परिवाद संख्या 95/25 पर आधारित है। परिवादी का आरोप है कि पाकुड़ जिले में पत्थर खनन पट्टों की स्वीकृति में फर्जी दस्तावेज़ों का सहारा लिया गया, और इसमें खनन लीजधारियों के साथ-साथ राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आंकलन प्राधिकरण (SEIAA) और पर्यावरण परामर्शदाता एजेंसियों की साझी साजिश शामिल है।सवाल यह भी उठता है कि बिना वैध दस्तावेज़ों और जांच के, पर्यावरणीय स्वीकृति कैसे दी गई? क्या ये स्वीकृतियां सिर्फ़ कागज़ों पर ही थीं?
महालेखाकार की रिपोर्ट भी उठाती है उंगलियां
इतना ही नहीं, झारखंड के महालेखाकार (CAG) की अंकेक्षण रिपोर्ट में भी इस घोटाले को लेकर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में साफ तौर पर दर्शाया गया है कि लीज प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं और मनमानी बरती गई। इसके बावजूद, न तो जिला प्रशासन ने और न ही SEIAA ने अब तक कोई आपराधिक प्राथमिकी दर्ज की है।
ACB जांच में भी आरोप सही पाए गए
पंकज यादव द्वारा झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल याचिका संख्या W.P.(Cr.) 534/2025 अभी विचाराधीन है। इस बीच ACB ने मामले का सत्यापन (Verification) कराया, जिसमें आरोप prima facie सही पाए गए। सत्यापन के आधार पर अब ACB के अपर पुलिस अधीक्षक, रांची ने निगरानी विभाग के प्रधान सचिव को पत्र भेजकर प्रारंभिक जांच की औपचारिक अनुमति मांगी है।
जांच की अनुमति मिलते ही कई अधिकारी आ सकते हैं रडार पर
सूत्रों की मानें तो जांच शुरू होते ही खनन विभाग, SEIAA, पर्यावरण कंसल्टेंसी फर्मों, और जिला प्रशासन के कई वर्तमान और पूर्व अधिकारी ACB के रडार पर आ सकते हैं। इसके साथ ही जिन लीजधारियों ने फर्जी दस्तावेज़ों के बल पर स्वीकृति ली है, उनके खिलाफ फर्जीवाड़ा, भ्रष्टाचार, और साजिश की धाराएं लग सकती हैं।
क्यों हिला सकता है यह मामला सरकार की नींव?
1. करोड़ों के खनन राजस्व में सेंध – फर्जी लीज और पर्यावरणीय मंज़ूरी के जरिए सरकार को करोड़ों का घाटा।
2. पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी – अवैध खनन से पर्यावरण को भारी क्षति की आशंका।
3. अधिकारियों की मिलीभगत – उच्च स्तर तक भ्रष्टाचार की चेन की आशंका।
4. जनता के अधिकारों का हनन – स्थानीय लोगों को बिना जानकारी या सहमति के खनन की इजाजत।
क्या बोले परिवादी पंकज यादव?
“यह कोई सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आपराधिक साजिश है, जिसमें कई ताकतवर लोग शामिल हैं। राज्य सरकार यदि वाकई भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाना चाहती है, तो इसे टेस्ट केस की तरह ले और जांच को तुरंत मंज़ूरी दे।” – पंकज कुमार यादव
अब निगाहें निगरानी विभाग पर
ACB की ओर से सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ भेजा गया पत्र अब निगरानी विभाग के निर्णय की प्रतीक्षा में है। अगर विभाग जांच की अनुमति देता है, तो यह झारखंड के इतिहास में खनन क्षेत्र का सबसे बड़ा खुलासा साबित हो सकता है।
सरकार पर दबाव बढ़ा
राज्य सरकार के लिए यह मामला अब सिर्फ भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बन गया है। यदि जांच को रोका गया, तो यह सरकार की नीयत पर बड़ा सवाल बनकर उभरेगा।


