
पलामू। राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू है, लेकिन पलामू का स्वास्थ्य विभाग खुद को इससे ऊपर मान बैठा है। चुनाव आयोग के सख्त दिशा-निर्देशों को दरकिनार करते हुए जिला स्वास्थ्य समिति, पलामू ने एएनएम का ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश जारी कर दिया, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
30 जनवरी 2026 को जारी ज्ञापांक-176 के तहत शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत 7 एएनएम को उनके मूल पदस्थापन स्थल से हटाकर सदर अस्पताल क्षेत्र में प्रतिनियुक्त कर दिया गया।
आदेश में साफ लिखा है कि यह व्यवस्था “तत्काल प्रभाव से लागू” होगी, जो सीधे-सीधे आचार संहिता की अवहेलना है।
ये है पूरा ट्रांसफर-पोस्टिंग का खेल
आदेश के मुताबिक
—UPHC नई मुहल्ला से चार एएनएम
UPHC निमिया से दो एएनएम
UPHC चेंपुर से एक एएनएम को हटाकर सदर मेदिनीनगर में पदस्थापित किया गया है।
इन एएनएम का किया गया तबादला
काजल कुमारी, कुमारी संध्या सिंह, त्रिवेणी देवी, रश्मि कुमारी, मुदिता कुमारी, निराली देवी और राजकुमारी कुमारी को नए स्थान पर योगदान देने का आदेश दिया गया है।
नियम-कानून ताक पर, मनमानी चरम पर आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी सरकारी कर्मी का तबादला चुनाव आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने न अनुमति ली, न ही कोई स्पष्टीकरण दिया।
इससे यह सवाल उठना लाज़िमी है कि क्या यह आदेश राजनीतिक दबाव में जारी किया गया? या फिर विभाग के भीतर सेटिंग-गेटिंग का नतीजा है?
सुविधाजनक पोस्टिंग की गंधसूत्र बताते हैं कि सभी एएनएम को सुविधाजनक और प्रभावशाली क्षेत्र में भेजा गया है, जबकि शहरी स्वास्थ्य केंद्र पहले से ही स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। इससे आम जनता की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सीधा असर पड़ने की आशंका है।
चुनाव आयोग की चुप्पी क्यों? अब सबसे बड़ा सवाल चुनाव आयोग से है—क्या इस खुले उल्लंघन पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? अगर जांच हुई तो जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली कटघरे में यह पूरा मामला एक बार फिर साबित करता है कि पलामू में स्वास्थ्य विभाग नियमों से नहीं, मनमानी से चलता है। आचार संहिता जैसे संवैधानिक प्रावधानों की खुलेआम अनदेखी लोकतंत्र की मर्यादा पर सीधा प्रहार है।
