
धनबाद। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 54वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने समावेशी झारखंड का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मूलवासियों के साथ-साथ बाहर से आकर यहां बसे लोग भी खुद को झारखंडी कहने में गर्व महसूस करते हैं। “जन्म देने वाली मां से पालन करने वाली मां का दर्जा बड़ा होता है,” उन्होंने कहा।
गोल्फ ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन को याद करते हुए कहा कि यह सिर्फ स्थापना दिवस नहीं, बल्कि उनके सपनों को पूरा करने का संकल्प दिवस है। उन्होंने कहा कि ‘जोहार’ अब झारखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश-दुनिया में पहचान बना चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड आंदोलन लंबी कुर्बानियों का परिणाम है। भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, बिनोद बिहारी महतो और ए.के. राय जैसे नेताओं के बलिदान ने राज्य को पहचान दी। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य को वर्षों तक बीमारू बनाकर रखा गया, स्कूल बंद किए गए और गरीबों को कमजोर किया गया।
सोरेन ने कहा कि ‘अबुआ सरकार’ बनने के बाद स्कूल दोबारा खुले, शिक्षा व्यवस्था मजबूत की गई और 26 हजार युवाओं को नौकरी दी गई। गरीब परिवारों को 2500 रुपये की सहायता दी जा रही है। उन्होंने माताओं-बहनों से बच्चों को उच्च शिक्षा और आईएएस-आईपीएस बनने के लिए प्रेरित करने की अपील की।धनबाद में आउटसोर्सिंग पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय लोगों को रोजगार में हक मिलना चाहिए। सरकार ने 75 प्रतिशत स्थानीय नियुक्ति का कानून बनाया है।
उन्होंने ऐलान किया कि अग्निवीर योजना के तहत शहीद जवान के परिजनों को झारखंड सरकार नौकरी देगी।अंत में मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि निकाय और पंचायत चुनाव में संगठन को मजबूत करें। “गांव भी हमारा, शहर भी हमारा—कोई कोना नहीं छोड़ना है।
