रांची: झारखंड के कई गहन माओवादी प्रभावित जिलों में हालात अब अपेक्षाकृत शांत हैं। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक पूरे राज्य में लगभग 85 माओवादी सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिनमें से 45 पर इनाम घोषित है। इनमें से करीब 65 माओवादी केवल सारंड़ा क्षेत्र में सक्रिय हैं और वहीं भारी इनामी काडर भी मौजूद हैं , ₹1 करोड़, ₹25 लाख, ₹10 लाख और ₹5 लाख तक के इनाम दर्ज हैं। माओवादी गतिविधियों को समाप्त करने के उद्देश्य से झारखंड पुलिस ने ओडिशा पुलिस के साथ संयुक्त अभियान तेज कर दिया है। इस अभियान के हिस्से के रूप में कुल आठ नए सुरक्षा कैंप बनाए जा रहे हैं , जिनमें से तीन कैंप ओडिशा में और पांच कैंप झारखंड-ओडिशा सीमा पर स्थापित किए जा रहे हैं। सुरक्षा बलों का कहना है कि ये कैंप सारंडा के सारे संभावित निकलने के मार्गों को कण्ट्रोल करने और आवागमन रोकने में मददगार साबित होंगे।पुलिस ने बताया कि यह घेराबंदी खुफिया सूचनाओं के आधार पर ही की जा रही है। कैंप बन जाने से माओवादियों के लिए जंगल से बाहर आने के रास्ते बंद होंगे और उनके राशन, पानी व दैनिक आवश्यकताओं की आपूर्ति ठप करने का प्रयास किया जाएगा , ताकि उन्हें मुख्य धारा में लौटने के लिए मजबूर किया जा सके। झारखंड पुलिस ने माओवादियों को राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति का लाभ उठाने का प्रस्ताव भी दिया है; वहीं पुलिस ने साफ किया है कि आत्मसमर्पण नहीं करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। राज्य का लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक माओवादी गतिविधियों को समाप्त किया जाए। पुलिस की कार्रवाई के परिणामस्वरूप इस साल अब तक 32 माओवादी ढेर हुए हैं, जबकि कई ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया है। पुलिस के अनुसार कुछ माओवादी साथी आत्मसमर्पण के मूड में हैं, लेकिन उनके भरोसेमंद मध्यस्थ न मिलने के कारण वे अभी मुख्य धारा में नहीं लौट पा रहे। सुरक्षा बल आशा कर रहे हैं कि नया नियंत्रण ढांचा और बढ़ी सतर्कता सारंडा में बचे काडरों पर निर्णायक प्रभाव डाल सकेगी।

