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सारंडा में फिर उफान पर माओवादी आतंक: एयरटेल टावर पर हमला, IED विस्फोट से तीसरे हाथी की मौत

पश्चिमी सिंहभूम : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के घने सारंडा जंगल में माओवादी गतिविधियां एक बार फिर तेज़ी से सिर उठा रही हैं। “प्रतिशोध सप्ताह” के तहत माओवादियों ने शनिवार रात जराईकेला थाना क्षेत्र के कोलभोंगा गांव में एयरटेल कंपनी के मोबाइल टावर पर हमला कर दिया। हमले के दौरान माओवादियों ने टावर परिसर में रखे उपकरणों को आग के हवाले कर दिया, जिससे पूरा संचार तंत्र नष्ट हो गया।

सूत्रों के अनुसार, करीब 20 की संख्या में हथियारबंद माओवादी देर रात गांव में दाखिल हुए। उन्होंने टावर परिसर की घेराबंदी को तोड़कर अंदर प्रवेश किया और नीचे स्थित जेनसेट तथा कंट्रोल यूनिट में पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। कुछ ही पलों में टावर का पूरा तकनीकी ढांचा जलकर राख हो गया।

ग्रामीणों ने बताया कि हमले के बाद माओवादियों ने मौके पर नारेबाजी की और अपने प्रभाव का संदेश देने की कोशिश की। माना जा रहा है कि इस हमले का उद्देश्य सुरक्षा बलों की संचार व्यवस्था को बाधित करना था ताकि क्षेत्र में हो रही कार्रवाई की जानकारी बाहर न जा सके।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम मौके के लिए रवाना हो गई है। पूरे इलाके में तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है और सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं।

इसी क्षेत्र में माओवादियों द्वारा बिछाए गए आईईडी विस्फोटक अब वन्यजीवों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहे हैं। कोलभोंगा इलाके में एक सप्ताह पहले हुए आईईडी विस्फोट में घायल हुई मादा हाथी ने शनिवार रात दम तोड़ दिया।

इस घटना के साथ ही इस साल माओवादियों के विस्फोट में मारे गए हाथियों की संख्या तीन हो गई है, जिससे वन विभाग में हड़कंप मच गया है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, विस्फोट में हाथी के पिछले पैर में गंभीर चोट आई थी। वन्य चिकित्सा टीम ने उसका लगातार इलाज किया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका और अंततः उसकी मौत हो गई।

इससे पहले भी सारंडा क्षेत्र में दो और हाथियों की मौत IED विस्फोट के कारण हो चुकी है। वन अधिकारियों का कहना है कि जंगल में बिछाए गए विस्फोटक न सिर्फ सुरक्षा बलों के लिए, बल्कि मासूम वन्यजीवों के लिए भी गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।वन विभाग ने इस मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी है। मृत हाथी का पोस्टमॉर्टम कराकर दफन की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है। विभाग अब उस इलाके में विशेष निगरानी और सर्च ऑपरेशन चलाने की योजना बना रहा है, ताकि आगे ऐसे हादसों से बचा जा सके।

लगातार बढ़ रही माओवादी गतिविधियों से स्थानीय ग्रामीणों में भय का माहौल है। उनका कहना है कि अब न केवल इंसानों की जान खतरे में है, बल्कि जंगल के निर्दोष वन्यजीव भी असुरक्षित हो गए हैं। ग्रामीणों ने सरकार से क्षेत्र में सुरक्षाबलों की गश्त बढ़ाने और माओवादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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