रांची। झारखंड और पश्चिम बंगाल में सक्रिय विशाल कोयला तस्करी नेटवर्क की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं। नकदी के बड़े प्रवाह, राजनीतिक संरक्षण और कुछ प्रभावशाली अफसरों की मिलीभगत के आरोपों से घिरे इस सिंडिकेट की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नए सिरे से तेज कर दी है।
इस बार एजेंसी की नजर कोयला तस्करी से जुड़े घटनाक्रमों की मॉनिटरिंग, खनन क्षेत्रों की सुरक्षा और परिवहन सिस्टम पर कथित रूप से नियंत्रण रखने वाले प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों पर है।
ईडी ने झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग और राज्य पुलिस मुख्यालय को विस्तृत पत्र भेजते हुए
2015 के बाद धनबाद में तैनात रहे सभी वरिष्ठ अधिकारियों के चरित्र-आचरण, तैनाती विवरण और सेवा रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है। धनबाद, जो देश की कोयला राजधानी माना जाता है, लंबे समय से अवैध खनन, तस्करी और माफिया गतिविधियों का गढ़ रहा है। सूत्र बताते हैं कि ईडी की ताजा कार्रवाई उसी पैटर्न का हिस्सा है, जिसके जरिए एजेंसी पिछले कई वर्षों के दाखिले और दस्तावेज़ों को खंगालकर एक विस्तृत नेटवर्क मैप तैयार कर रही है।
2015 से अब तक पदस्थ सभी अधिकारी जांच के घेरे में
ईडी ने जिन अधिकारियों के विवरण मांगे हैं, उनमें—
• सभी डीसी (उपायुक्त)
• एसएसपी
• सिटी एसपी
• ग्रामीण एसपी
• सभी डीएसपी, विशेषकर उन इलाकों में तैनात अधिकारी जहाँ से कोयला परिवहन मार्ग गुजरते हैं
शामिल हैं। एजेंसी का मानना है कि 2015 से 2024 के बीच धनबाद में कोयला तस्करी संगठित अपराध की तरह फल-फूल रही थी और इस दौरान अलग-अलग अधिकारियों के कार्यकाल में कई संदिग्ध गतिविधियाँ दर्ज की गईं। इन वर्षों के दौरान न सिर्फ कोयला चोरी, अवैध खनन और ओवरलोडेड ट्रकों की धड़ल्ले से आवाजाही बढ़ी, बल्कि कई बार स्थानीय पुलिस पर ढिलाई तथा कुछ अधिकारियों पर जानबूझकर कार्रवाई न करने के आरोप भी लगाए गए। अब ईडी इन्हीं तत्वों को जोड़कर समझने की कोशिश कर रहा है कि तस्करी सिंडिकेट के विस्तार में किस स्तर पर शिथिलता या सांठगांठ रही।
ईडी ने मांगे महत्वपूर्ण दस्तावेज
कार्मिक विभाग और पुलिस मुख्यालय को भेजे गए पत्र में ईडी ने अधिकारियों की तैनाती से जुड़े कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड मांगे हैं, जिनमें शामिल हैं—
• पदस्थापना आदेश
• उस अवधि के दौरान अधिकारियों द्वारा लिए गए प्रशासनिक फैसले
• खनन क्षेत्रों की मॉनिटरिंग और पुलिसिंग से संबंधित फाइलें
• संवेदनशील क्षेत्रों में की गई रेड, जब्ती या ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज
• उन इलाकों में तैनात थाना प्रभारियों और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की रिपोर्ट
• विवादित फैसले, स्थानांतरण, अनुशासनात्मक कार्रवाई और शिकायतों का विवरण
सूत्र बताते हैं कि ईडी ने विशेष रूप से उन क्षेत्रों की फाइलें खंगालने को कहा है जहाँ से बड़ी मात्रा में अवैध रूप से कोयला निकाला गया था।
तस्करी नेटवर्क की जड़ें कई जिलों तक फैलीं
ईडी की जांच केवल धनबाद तक सीमित नहीं रहेगी। इससे जुड़े कई रूट कोयला क्षेत्रों से निकलकर बोकारो, गिरिडीह, रामगढ़ और बंगाल के आसनसोल व रानीगंज तक जाते हैं। तस्करी का यह नेटवर्क ट्रक मालिकों, खनन ठेकेदारों, स्थानीय नेताओं और कुछ प्रभावशाली अफसरों की मदद से वर्षों तक फलता-फूलता रहा।
ईडी पिछले दो वर्षों से इस नेटवर्क की फाइनेंशियल ट्रेल को समझने की कोशिश कर रहा है। अब प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल शुरू होने से जांच एक नए चरण में प्रवेश कर गई है।
कई अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, दस्तावेज मिलने के बाद कई अधिकारियों से पूछताछ की संभावना मजबूत हो गई है।
ईडी उन अधिकारियों से अलग-अलग बिंदुओं पर सवाल कर सकता है, जैसे—
• अवैध खनन की शिकायतें आने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
• परिवहन मार्गों पर तैनात पुलिस को किसके आदेश पर “नॉन-इंटरफेयर” किया गया?
• किन दबावों या किन परिस्थितियों में विवादित आदेश जारी किए गए?
• कोयला माफिया की गतिविधियों की निगरानी में क्या बाधाएँ आईं?
• संवेदनशील इलाकों में रात के समय गश्ती व्यवस्था बार-बार क्यों ढह गई?
ईडी यह भी जांच करेगा कि किसी अधिकारी के कार्यकाल के दौरान कोयला तस्करी से होने वाली आय में असामान्य वृद्धि या गिरावट का ट्रेंड दिखता है या नहीं।
कोयला तस्करी: एक समानांतर अर्थव्यवस्था
जानकार बताते हैं कि झारखंड में कोयला तस्करी अपने आप में एक समानांतर “काला कारोबार अर्थव्यवस्था” बन चुका है। खनन क्षेत्रों से लेकर रेलवे साइडिंग, परिवहन, वजन माप मशीनों और चेकपोस्टों तक, कई स्तरों पर यह नेटवर्क काम करता है। कई बार ओवरलोडेड ट्रकों और “ब्लैक ट्रिप” (बिना चालान वाले कोयले) के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध आमदनी होती है। इसमें स्थानीय पुलिस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि परिवहन मार्गों पर नियंत्रण इन्हीं के पास होता है।
पुलिस और प्रशासन में हलचल
ईडी के हालिया पत्र के बाद पुलिस मुख्यालय और कार्मिक विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। कई अधिकारी, जो पिछले वर्षों में धनबाद में तैनात रहे हैं, अब अपने कार्यकाल की फाइलें खंगाल रहे हैं। कुछ से स्पष्टीकरण मांगे जा सकते हैं, जबकि कुछ को सीधे समन भेजा जा सकता है।
हालांकि, कई अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में पूरी ईमानदारी से काम किया और यदि जांच निष्पक्ष रूप से होगी तो तथ्य स्वयं स्पष्ट हो जाएंगे।
तस्करी सिंडिकेट के कई लिंक ईडी के कब्जे में
एजेंसी ने पिछले वर्षों में कई ठिकानों पर छापेमारी कर करोड़ों रुपये की अचल व चल संपत्ति, सोना-चांदी, बैंक खाते और दस्तावेज जब्त किए हैं। मोबाइल चैट, वॉयस रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी फुटेज और ट्रांसपोर्ट रजिस्टरों से मिले सुराग अब अधिकारियों की तैनाती और गतिविधियों के साथ मिलान किए जा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि ईडी एक व्यापक रिपोर्ट तैयार कर रहा है, जिसमें तस्करी सिंडिकेट के नेटवर्क, संरक्षण, वित्तीय लेनदेन और संवेदनशील पदस्थापनाओं का पूरा नक्शा तैयार होगा। आवश्यकता पड़ने पर एजेंसी सीबीआई और आयकर विभाग के साथ भी समन्वय कर सकती है।
जांच आगे बढ़ते ही कई बड़े खुलासों की उम्मीद
जैसे-जैसे दस्तावेज मिलेंगे और पूछताछ आगे बढ़ेगी, कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं। माना जा रहा है कि कुछ अधिकारी, जिन पर पहले भी शंका के बादल मंडराते रहे हैं, इस बार सीधे सवालों के घेरे में आ सकते हैं।
फिलहाल, ईडी की कार्रवाई ने झारखंड के पुलिस और प्रशासनिक सिस्टम दोनों को हिला दिया है। प्रदेश की सबसे बड़ी तस्करी गतिविधि से जुड़े इस मामले में आने वाले दिनों में कई और कदम उठाए जा सकते हैं और कई अधिकारियों को कठिन सवालों का सामना करना पड़ सकता है।

