रांची : राज्य के सभी ब्लड बैंकों के संचालन में पारदर्शिता, दक्षता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अब डिजिटल प्रणाली लागू की जा रही है। इसके तहत ब्लड बैंक मैनेजमेंट सिस्टम (Blood Bank Management System) शुरू किया जाएगा। इस उद्देश्य से दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार को नामकोम स्थित आरसीएच परिसर के आईपीएच सभागार में आरंभ हुआ।
प्रशिक्षण का उद्घाटन स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा ने किया। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी ब्लड बैंकों में अब रक्त जांच रैपिड टेस्ट किट की जगह एलिजा, केमिल्यूमिनेसेंस और सीबीनैट तकनीक से की जाएगी, ताकि रक्त की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।डॉ. अरोड़ा ने बताया कि प्रत्येक ब्लड बैंक कर्मी की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित कर दी गई हैं। सभी कर्मचारियों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण समर्पण और जिम्मेदारी के साथ करना होगा।
उन्होंने सभी ब्लड बैंकों में कंप्यूटर ऑपरेटर की उपलब्धता सुनिश्चित करने और इलेक्ट्रॉनिक ब्रॉडबैंड प्रबंधन प्रणाली के तहत डेटा को नियमित रूप से अपडेट करने पर भी जोर दिया।प्रशिक्षण के दौरान सी-डैक (C-DAC) के राष्ट्रीय विशेषज्ञ रामजी गुप्ता ने प्रतिभागियों को ब्लड बैंक मैनेजमेंट सिस्टम की विस्तृत जानकारी दी और इसके संचालन से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया।
कार्यक्रम में सहायक निदेशक (औषधि) ने रक्त केंद्रों के सुचारू संचालन पर प्रस्तुति दी और सभी ब्लड बैंकों को मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप कार्य करने के निर्देश दिए। बताया गया कि ई-रक्तकोष और ब्लड बैंक मैनेजमेंट सिस्टम के संचालन में आने वाली तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए राज्यभर से छह मास्टर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है।
प्रत्येक जिले में ई-रक्तकोष प्रणाली के लिए मास्टर प्रशिक्षक नियुक्त किए जाएंगे, जो किसी भी तकनीकी या प्रबंधन से जुड़ी समस्या का समाधान शीघ्र कर सकेंगे।कार्यक्रम में एसबीटीसी के सदस्य सचिव डॉ. एस.एस. पासवान, सहायक परियोजना निदेशक डॉ. पी.के. सिन्हा सहित अन्य अधिकारी और ब्लड बैंक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
इस प्रशिक्षण के माध्यम से झारखंड में ब्लड बैंक प्रणाली को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

