रांची। झारखंड के उच्च शिक्षा विभाग में वर्षों से दबा पड़ा प्रमोशन घोटाला अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। लैब असिस्टेंट, डेमोनस्ट्रेटर और यहाँ तक कि क्लर्क पद से सीधे एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष बनने तक की अनियमितताएँ सामने आ चुकी हैं। विभाग अब ऐसे सभी पदोन्नत कर्मियों पर सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है, जिसमें बर्खास्तगी तक की संभावना जताई जा रही है। (CLERK bane PROFESSOR)
क्या है पूरा मामला?
उच्च शिक्षा विभाग ने इस प्रकरण की अंतिम जांच और सत्यापन के लिए 29 जनवरी को रांची में एक अहम बैठक बुलायी है। सुप्रीम कोर्ट और राजभवन द्वारा लगातार उठाए गए सवालों के बाद मई 2025 में इस घोटाले का खुलासा हुआ था। इसके बाद से पूरे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
योग्यता की अनदेखी, नियमों की खुली अवहेलना
जांच में सामने आया कि कई पदोन्नत कर्मियों के पास नियुक्ति के समय अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता तक नहीं थी, यहाँ तक कि कई के पास स्नातकोत्तर (PG) की डिग्री भी नहीं थी—जो किसी भी विश्वविद्यालय में शिक्षक बनने की बुनियादी शर्त है। (CLERK bane PROFESSOR)सुप्रीम कोर्ट के साफ आदेशों के बावजूद कि डेमोनस्ट्रेटर को शिक्षक नहीं बनाया जा सकता, राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों ने 2011 के बाद भी मनमाने ढंग से प्रमोशन बांट दिए।
राजकोष पर करोड़ों का बोझ
इन अवैध प्रमोशनों के कारण झारखंड के राजकोष पर कई करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा है। विभागीय रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई पदों पर वर्षों तक अवैध वेतन और भत्ते का भुगतान किया गया।


