पलामू: आजसू पार्टी के केंद्रीय सचिव विजय मेहता ने शनिवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पूर्व मंत्री के.एन. त्रिपाठी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि त्रिपाठी सत्ताधारी दल का धौंस दिखाकर एक ईमानदार महिला पदाधिकारी पर अपनी मनमानी थोपना चाहते हैं।
विजय मेहता ने कहा कि के.एन. त्रिपाठी सामंती मानसिकता के, महिला विरोधी व्यक्ति हैं। वे पहले भी कई महिला अधिकारियों से विवाद में रह चुके हैं। सदर प्रखंड की बीडीओ छवि बाला, तत्कालीन उपायुक्त पूजा सिंघल और समाज कल्याण पदाधिकारी नीता चौहान (जो भाजपा नेता मनोज सिंह की पत्नी हैं) — सभी से ये टकरा चुके हैं। उस समय नीता चौहान गंभीर रूप से बीमार थीं, बावजूद इसके इनका तबादला जामताड़ा करा दिया गया था।
मेहता ने आगे कहा कि त्रिपाठी जी का महिला विरोधी रवैया नया नहीं है। पलामू में सेक्रेड हार्ट स्कूल की महिला प्रिंसिपल के साथ भी इनका विवाद लोगों को आज तक याद है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष का जो मामला ये उठा रहे हैं, वह पुराना है और इसका वर्तमान घटनाक्रम से कोई लेना-देना नहीं। केंद्रीय सचिव ने आरोप लगाया कि त्रिपाठी जी को अंगरक्षक में भी अपनी जाति के ही लोग चाहिए, जबकि वोट मांगने के समय वे दलित, पिछड़ा, आदिवासी और मुसलमान समुदाय के पास जाते हैं। एक मंत्री रह चुके व्यक्ति का यह बयान बेहद निंदनीय है।
उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा कि हेमंत सोरेन ने जब ददई दुबे को मंत्रिमंडल से हटाया, तो कुछ समय के लिए त्रिपाठी जी को मंत्री बना दिया गया। इसके बाद उनका ऐसा व्यवहार हुआ कि जनता ने लगातार तीन विधानसभा और एक लोकसभा चुनाव में उन्हें हराकर घर बैठा दिया। अब जब सत्ता से दूर हैं तो मानसिक संतुलन खो चुके हैं और गठबंधन की सरकार के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।
विजय मेहता ने पलामू की पुलिस अधीक्षक रेशमा रमेशन की भी सराहना की और कहा कि वे एक स्वच्छ छवि की तेजतर्रार अधिकारी हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल में कई घटनाओं का खुलासा कर अपराधियों को जेल पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि त्रिपाठी जी राजनीति में जिंदा रहने के लिए आए दिन उलझनें पैदा करते रहते हैं। मेहता ने बताया कि त्रिपाठी अपने विधायक कार्यकाल में भी तत्कालीन एसपी अनूप टी. मैथ्यू से भिड़ चुके हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष – किसी भी दल का कोई नेता रेशमा रमेशन की कार्यशैली का विरोध नहीं करता, सिवाय त्रिपाठी के।
उन्होंने सवाल किया कि त्रिपाठी जी आंदोलन करने की बात करते हैं, लेकिन बताएँगे किस जाति के लोगों के साथ आंदोलन करेंगे? अपने स्वजातीय लोग भले ही वोट दे दें, लेकिन सड़कों पर उतरकर इनके लिए समय बर्बाद नहीं करेंगे। दलित, पिछड़ा और आदिवासी तो इनके व्यवहार से पहले ही दूर हैं। अंत में विजय मेहता ने चेतावनी दी कि त्रिपाठी द्वारा भूमि कब्जा कर बनाए गए अस्पताल को मुक्त कराने के लिए बहुत जल्द पलामू की धरती पर जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

