रांची। झारखंड में लागू पेसा नियमावली के तहत पारंपरिक ग्राम सभा को महत्वपूर्ण न्यायिक अधिकार दिए गए हैं। ग्राम सभा अब किसी क्षति के मामले में दंड तय कर सकेगी। यदि गलती बिना दुर्भावना के हुई हो तो आरोपी द्वारा भूल स्वीकार करना, पश्चाताप करना और भविष्य में गलती न दोहराने की प्रतिज्ञा को ही उपयुक्त दंड माना जाएगा।
ग्राम सभा को अधिकतम 1000 रुपये तक का आर्थिक जुर्माना लगाने का अधिकार होगा, लेकिन कारावास की सजा देने का अधिकार नहीं होगा। जुर्माने की राशि आर्थिक नुकसान और आरोपी की क्षमता के आधार पर तय की जाएगी और ग्राम सभा कोष में जमा होगी। साथ ही दंडित व्यक्ति के अपीलीय अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
ग्राम सभा के फैसले से असहमति होने पर पहले पारंपरिक ऊपरी सामाजिक व्यवस्था—जैसे मोडे मांझी, पड़हा राजा, मांझी परगना—के समक्ष अपील की जा सकेगी। इसके बाद भी असहमति रहने पर 30 दिनों के भीतर सक्षम न्यायालय या अनुमंडल पदाधिकारी के समक्ष अपील का प्रावधान है।
पुलिस की भूमिका सीमितपेसा के प्रभावी होने पर गिरफ्तारी से पहले पुलिस को ग्राम सभा की अनुमति लेनी होगी। यदि यह संभव न हो, तो गिरफ्तारी के 48 घंटे के भीतर ग्राम सभा को सूचना देना अनिवार्य होगा। विशेष परिस्थितियों में भी पुलिस को अधिकतम 15 दिनों के भीतर पूरी जानकारी देनी होगी।
इन जिलों में लागू होगा पेसादक्षिणी छोटानागपुर: रांची, खूंटी, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, लातेहारकोल्हान: पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावांसंथाल परगना: दुमका, साहेबगंज, पाकुड़, जामताड़ाआंशिक रूप से: गोड्डा और पलामू के कुछ प्रखंड


