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घने कोहरे की चपेट में झारखंड: गरीबों, बच्चों और बुजुर्गों पर कुछ तो रहम कीजिए सरकार —न स्कूल बंद, न बुजुर्गों को कंबल, न अलाव की कोई व्यवस्था

रांची। झारखंड इन दिनों घने कोहरे और कड़ाके की ठंड की चपेट में है। सुबह से लेकर दिन तक दृश्यता बेहद कम बनी हुई है, सड़कों पर हादसों का खतरा बढ़ गया है और ठिठुरन लोगों की दिनचर्या पर भारी पड़ रही है।

लेकिन हालात से निपटने को लेकर सरकारी तंत्र पूरी तरह संवेदनहीन नजर आ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी गरीबों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। घने कोहरे और ठंड के बावजूद न तो स्कूलों को बंद किया गया है, न ही बुजुर्गों और जरूरतमंदों के लिए कंबल वितरण की कोई ठोस व्यवस्था दिख रही है। चौक-चौराहों पर अलाव तक की व्यवस्था नहीं की गई है।

सुबह-सुबह छोटे-छोटे बच्चे ठंड और कोहरे में स्कूल जाने को मजबूर हैं। वहीं फुटपाथों पर रहने वाले गरीब और मजदूर ठिठुरती रातें खुले आसमान के नीचे काटने को विवश हैं। बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए यह मौसम जानलेवा साबित हो सकता है, लेकिन प्रशासनिक मशीनरी अब तक सिर्फ फाइलों में ही सक्रिय नजर आ रही है।

मौसम विभाग के अनुसार राज्य के कई जिलों में न्यूनतम तापमान 7 से 9 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। रांची, पलामू, लातेहार, खूंटी, लोहरदगा और आसपास के जिलों में ठंड और शीतलहर का असर लगातार बढ़ रहा है। सुबह की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो अनौपचारिक कर्फ्यू लग गया हो।

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि सरकार को तुरंत सभी जिलों में प्रखंड स्तर पर अलाव की व्यवस्था करनी चाहिए और गरीब व बुजुर्ग लोगों के बीच कंबल का वितरण सुनिश्चित करना चाहिए। इसके साथ ही छोटे बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए फिलहाल स्कूलों को बंद करने या समय में बदलाव पर भी विचार किया जाना चाहिए।

मौसम विभाग ने अगले तीन-चार दिनों तक ठंड और घने कोहरे की स्थिति बने रहने की संभावना जताई है। ऐसे में लोगों ने सरकार की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है और यही कह रही है—कुछ तो रहम कीजिए सरकार, क्योंकि ठंड किसी का इंतजार नहीं करती।

सवाल यह है कि क्या किसी बड़े हादसे या मौत का इंतजार किया जा रहा है?

क्या हर साल की तरह इस बार भी ठंड से मौतें होने के बाद ही सरकार जागेगी?

लोगो का कहना है कि ठंड और कोहरा कोई नई आपदा नहीं है, यह हर साल आता है। फिर भी पूर्व तैयारी का पूरी तरह अभाव सरकार और प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है।

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