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पूर्व मुख्यमंत्री बूलाल मरांडी के बेटे और बहू को जान का खतरा, सरकार और जिला प्रशासन ने सुरक्षा में ढिलाई बरती

रांची: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के बेटे सनातन मरांडी ने अपने और अपनी पत्नी प्रीति किस्कू की जानमाल की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। सनातन मरांडी ने गिरिडीह एसपी से कई बार सुरक्षा मुहैया कराने की गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

सनातन मरांडी के पास एक सरकारी बॉडीगार्ड है और उनकी पत्नी को पलामू में उनके अधिकारी होने के कारण एक बॉडीगार्ड मुहैया कराया गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे सनातन मरांडी ने जिला प्रशासन से दो-दो सुरक्षा देने की मांग की, लेकिन प्रशासन की प्रतिक्रिया न के बराबर रही। सनातन मरांडी का कहना है कि उन्हें और उनकी पत्नी को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, जिसके बावजूद जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सनातन मरांडी ने इस संबंध में कई बार गिरिडीह एसपी से सुरक्षा मुहैया कराने की गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन की प्रतिक्रिया को लेकर उनका कहना है कि पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके परिवार के प्रति संभावित खतरे की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है।

परिवार के करीबी लोग भी इस मामले को लेकर चिंतित हैं और उन्होंने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर सुरक्षा नहीं दी गई, तो स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की राजनीतिक हैसियत और परिवार की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन पर जनता और पार्टी के दबाव बढ़ सकते हैं।

बता दें कि बाबूलाल मरांडी के एकमात्र बेटे सनातन मरांडी ही आज जीवित हैं। उनके भाई अनूप मरांडी की हत्या 26 अक्टूबर 2007 को गिरिडीह जिले के चिलखारी फुटबॉल मैदान में हुई थी। उस समय आदिवासी सांस्कृतिक कार्यक्रम चल रहा था और लगभग 15,000 लोग मौजूद थे। तभी माओवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें अनूप मरांडी समेत 20 लोगों की मौत हो गई।

इस नरसंहार के पीछे माओवादी संगठन का हाथ था। खासतौर पर नक्सलियों की नजरें बाबूलाल मरांडी के छोटे भाई नुनूलाल मरांडी पर थीं, जो कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। नुनूलाल तो बच गए, लेकिन अनूप मरांडी और अन्य लोग मारे गए। इस घटना में माओवादी नेता सहदेव सोरेन का नाम सामने आया था, जो 14 सितंबर 2025 को झारखंड के हजारीबाग जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया।

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