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EXCLUSIVE – PART 4 : किसने दी कृष्णा इंफ्रास्ट्रक्चर को हरी झंडी? अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

रांची : रामगढ़ में CCL की सारूबेड़ा परियोजना समेत तापिन साउथ, जरंगडीह और सिरका में हुए ठगी के मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है — कृष्णा इंफ्रास्ट्रक्चर को टेंडर पास करने की अनुमति आखिर किसने दी? और जब मशीनें साइट पर थीं ही नहीं, तो करोड़ों का भुगतान कैसे हो गया?

जांच में सामने आया है कि कंपनी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए CCL की चार परियोजनाओं में ठेके हासिल किए। मशीनों की रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस, फिटनेस और GPS ट्रैकिंग से संबंधित दस्तावेजों की कोई स्वतंत्र जांच नहीं हुई। कागजों में मशीनें मौजूद थीं, लेकिन जमीन पर कहीं नहीं मिलीं।

स्थानीय एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, KD KARMUR ने बिना किसी संसाधन के टेंडर हासिल किए और काम छोटे-छोटे ठेकेदारों से कराया। जब भुगतान की मांग की गई, तो उन्हें धमकी दी गई या विवाद में उलझाकर भगा दिया गया।

पीड़ित ठेकेदारों का आरोप है कि इस पूरे मामले में प्रशासनिक चुप्पी खुद एक इशारा है कि अंदरखाने कुछ ना कुछ ‘सेटिंग’ जरूर थी।

अब तक CCL प्रबंधन की तरफ से ना तो कोई आंतरिक जांच शुरू की गई है, ना ही किसी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है। इससे साफ है कि बड़ी चूक हुई है, और इस पर पर्दा डालने की कोशिश हो रही है।

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