रांची : रामगढ़ में CCL की सारूबेड़ा परियोजना में फर्जीवाड़े का मामला और गहराता जा रहा है। गुजरात की कंपनी कृष्णा इंफ्रास्ट्रक्चर पर आरोप है कि उसने बिना किसी खुद की मशीनरी और संसाधनों के वर्क ऑर्डर हासिल कर, स्थानीय एजेंसियों से काम करवाया और कागजों के आधार पर करोड़ों रुपये वसूले।
पीड़ित एजेंसियों के माने तो कंपनी ने टेंडर प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी कर फर्जी दस्तावेज़, मशीन लिस्ट और रजिस्ट्रेशन नंबर लगाए। इसके बावजूद, CCL के अधिकारियों ने ना केवल इन दस्तावेजों को पास किया बल्कि बिना ग्राउंड वेरिफिकेशन के भुगतान भी जारी कर दिया। ये पूरा खेल Purposed Patch 03 (West OCP) में हुआ, जो कुजू क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
जांच में सामने आया है कि कंपनी ने एक भी मशीन साइट पर नहीं लगाई। स्थानीय ठेकेदारों की मशीनों से काम कराया गया, जिन्हें समय पर भुगतान भी नहीं किया गया।
पीड़ित एजेंसियों में शामिल RAJ YASHI CONSTRUCTION और MONIKA ENTERPRISES ने बताया कि उनके साथ मिलाकर करीब 15 करोड़ रुपये की ठगी हुई है।इन एजेंसियों ने CBI, ED, NIA और CCL के CVO से स्वतंत्र जांच की मांग की है। लेकिन अभी तक ना तो CCL प्रबंधन ने कोई आधिकारिक बयान दिया है और ना ही स्थानीय प्रशासन ने कोई सख्त कदम उठाया है।
प्रश्न यह है कि जब मशीनें ज़मीन पर थीं ही नहीं, तो बिल कैसे पास हुआ? क्या CCL के अंदरूनी अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी?।
कल पढ़े Part 3 – CBI-ED-NIA से जांच की मांग तेज, फिर भी सिस्टम खामोश

