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EXCLUSIVE : झारखंड का ‘वीरपान’, ट्रेन लूटकांड का आरोपी, अदालत की हाजत से हथकड़ी समेत फरार… जिस पर आधारित कहानी पर बन चुकी है फिल्म ‘KILL’

रांची। झारखंड (तत्कालीन बिहार) के 80 के दशक में एक ऐसा नाम उभरा था, जिसने पूरे पलामू प्रमंडल और आसपास के जिलों में दहशत फैला दी थी—वीरपान। उसकी ट्रेन लूट की घटनाओं और फरारी की कहानी इतनी चर्चा में रही कि वर्षों बाद बॉलीवुड की चर्चित फिल्म ‘KILL’ के लिए इसी अपराध जगत से प्रेरित कथानक उठाया गया। क्षेत्रीय अपराध के इतिहास में यह एक ऐसा मामला है जो आज भी अनसुलझी गुत्थी बना हुआ है।

करीब 1985 में मेदिनीनगर (तब मेदिनीनगर) के एक गरीब परिवार से आने वाला यह युवक सामान्य और शांत स्वभाव का था। गांव के लोग उसे मेहनती और सरल मानते थे। लेकिन बरवाडीह से मेदिनीनगर लौटते समय टिकट न होने पर टीटी द्वारा बेरहमी से की गई पिटाई उसकी जिंदगी का निर्णायक मोड़ बन गई।ग्रामीणों के अनुसार, उसी अपमान ने उसे अपराध की राह पर धकेल दिया।

साल 1986–87 के बीच वीरपान और उसके पांच–छह साथियों ने चंदवा, हेहेगढ़ा और बरवाडीह के बीच चलने वाली कई यात्री ट्रेनों में लूटपाट की। यह इलाका उस समय घने जंगलों और कम सुरक्षा वाला था।

यात्रियों से नकदी व सामान की लूट, बोरियों की चोरी, और कई मामलों में मारपीट व गंभीर चोटें तक शामिल रहीं। पलामू, लातेहार और आसपास के थानों में उसके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गईं। पुलिस उसे कुछ मौकों पर गिरफ्तार भी कर पाई, पर उसकी पलायन की क्षमता असाधारण मानी जाती है।

सूत्र के अनुसार पहली बार 1986 में जब पुलिस उसे पकड़ने गांव पहुंची, तब वीरपान ने घर में रखी चना बनाने की लकड़ी-पत्थर की मशीन को राइफल की तरह पकड़ लिया। पुलिस ने उसे हथियारबंद समझ लिया और इसी दौरान वीरपान ने कोयल नदी में छलांग लगाकर भागने में सफलता पा ली।

सबसे बड़ा मामला वर्ष 1987 में सामने आया।
ट्रेन लूट की कई घटनाओं में गिरफ्तार वीरपान को अदालत में पेशी के लिए लाया गया था। उसके सभी साथी जमानत पर बाहर आ चुके थे जबकि वीरपान की सजा तय होने की उम्मीद थी।

इसी तनाव के बीच, उसने पुलिसकर्मियों की चूक का फायदा उठाया और हथकड़ी लगे हाथों के साथ अदालत परिसर से ही फरार हो गया। यह घटना उस दौर की पुलिस व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करने वाली मानी गई।

अदालत से फरार होने के बाद वीरपान की कोई ठोस खबर कभी सामने नहीं आई। स्थानीय सूत्रों, पुराने ग्रामीणों और इलाके में चर्चा के अनुसार ,उसने उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में साधु बनकर पूजा-पाठ किया, कई लोगों ने उसे हरियाणा के औद्योगिक इलाकों में मजदूर के रूप में देखे जाने का दावा किया, सूत्र का कहना है कि वह वर्षों तक आश्रमों में छिपकर रहा। हालांकि पुलिस ने कभी किसी दावे की पुष्टि नहीं की। पर यह तय है कि वह ना फिर गिरफ्तार हुआ और ना ही उसका कोई आधिकारिक रिकार्ड सामने आया।

वीरपान और उसके साथियों की ट्रेन लूट और हिंसक घटनाओं की कई कहानियों को बाद में फिल्म निर्माताओं ने कहानी का आधार बनाया।
बॉलीवुड की हिट फिल्म ‘KILL’ में कई दृश्य और घटनाएं पलामू–लातेहार रेलखंड पर हुई वास्तविक वारदातों से प्रेरित मानी जाती हैं।

ट्रेन लूट से लेकर अदालत की हाजत से फरारी तक, वीरपान की कहानी झारखंड के अपराध इतिहास की सबसे रहस्यमयी घटनाओं में शामिल है।

और यही वजह है कि उसका नाम आज भी क्षेत्रीय अपराध की सबसे बड़ी अनसुलझी कहानियों में गिना जाता है—
एक ऐसा नाम, जिस पर फिल्म बन चुकी है, पर जिसका अंत कभी सामने नहीं आया।

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