संजीत यादव
रांची : झारखंड पुलिस मुख्यालय की गोपनीय शाखा (एनजीओ सेल) में कथित वसूली नेटवर्क संचालन के आरोपों की जांच अब तेज हो गई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता के करीबी माने जाने वाले इंस्पेक्टर गणेश सिंह के खिलाफ प्रारंभिक रिपोर्ट (आईआर) दर्ज कर ली है। तीन माह के भीतर जांच पूरी कर आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। आरोप साबित होने पर प्रारंभिक जांच (पीई) और फिर एफआईआर की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
व्यापारियों से रकम वसूली का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि गणेश सिंह के साथ अनुज महतो, चंदन, दीपक कुमार मेहता, प्रभात कुमार दुबे, वीरेंद्र कुमार महतो और महावीर महतो की भूमिका भी संदिग्ध रही है। आरोप के अनुसार, इन सभी के माध्यम से धनबाद समेत राज्य के विभिन्न इलाकों में कोयला कारोबारियों, जमीन कारोबारी और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से वसूली की जाती थी। यह नेटवर्क कथित रूप से “संपर्क, दबाव और फाइल निस्तारण” के नाम पर सक्रिय था।
हाई कोर्ट में भी दर्ज हैं आरोप
इस मामले में झारखंड हाई कोर्ट में दायर एक याचिका के पूरक हलफनामे में भी आरोपों का उल्लेख है। याचिका में कहा गया है कि पूर्व डीजीपी के कार्यकाल में गणेश सिंह और उनके सहयोगियों ने दफ्तर की स्थिति का इस्तेमाल कर कई कारोबारी समूहों पर आर्थिक दबाव बनाया और पैसे की उगाहीकी गई है , मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। पोस्टिंग का क्रम भी जांच के दायरे में गणेश सिंह की तैनाती से जुड़ा क्रम भी एसीबी के लिए जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पहले झारखंड जगुआर में तैनात
अनुराग गुप्ता के एसीबी चीफ बनने पर उन्हें एसीबी में लगाया गया,बाद में अनुराग गुप्ता के डीजीपी बनने पर गणेश सिंह को गोपनीय शाखा का प्रभारी बना दिया गया, यह पद डीएसपी रैंक के अधिकारी को मिलता है, मगर गणेश सिंह इंस्पेक्टर रहते हुए प्रभारी बने अनुराग गुप्ता की वीआरएस के बाद उन्हें पुनः झारखंड जगुआर भेज दिया गया।
वर्तमान में प्रभारी डीजीपी तदाशा मिश्रा ने इंस्पेक्टर अरुण कुमार सिंह को एनजीओ सेल का नया प्रभारी नियुक्त किया है।


