रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने ज़मीन मामलों की जांच के लिए गठित सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) को भंग किए जाने पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बाबूलाल मरांडी ने यह बात अपने आधिकारिक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से कही है।
अपने पोस्ट में बाबूलाल मरांडी ने लिखा है कि भ्रष्टतम अधिकारी अनुराग गुप्ता द्वारा भयादोहन और वसूली के उद्देश्य से बनाई गई ज़मीन मामलों की एसआईटी को भंग किया जाना अच्छी बात है, लेकिन केवल एसआईटी भंग कर देने से पिछले दिनों में कथित रूप से किए गए पाप और गड़बड़ियां अपने आप नहीं धुल जाएंगी।
उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों को एसआईटी और सीआईडी के अधिकारियों द्वारा भयादोहन का शिकार बनाया गया, उन्हें न्याय कैसे मिलेगा। यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में इस तरह की लूट और भ्रष्टाचार पर अंकुश कैसे लगेगा।बाबूलाल मरांडी ने अपने फेसबुक पोस्ट में यह भी आरोप लगाया कि एसआईटी के तत्कालीन एएसपी दीपक कुमार, जिन्हें अनुराग गुप्ता के साथ हटाया गया, उन्होंने गुप्ता के लिए टूलकिट की तरह काम किया।
मरांडी के अनुसार दीपक कुमार ने न सिर्फ ज़मीन मामलों में बल्कि सीआईडी के अन्य मामलों में भी सबसे अधिक धांधली की। पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि सरकार विज्ञापन जारी कर उन सभी लोगों से शिकायतें आमंत्रित करे, जिन्हें एसआईटी या सीआईडी के अधिकारियों ने कथित रूप से लूटा या प्रताड़ित किया है।
साथ ही एसआईटी में शामिल रहे सभी अधिकारियों के कार्यकाल की समीक्षा, ज़मीन मामलों की जांच प्रक्रिया की निष्पक्ष पड़ताल तथा उनके और उनके परिजनों के नाम अर्जित नामी-बेनामी संपत्तियों की जांच किसी ईमानदार अधिकारी से कराई जाए।
बाबूलाल मरांडी ने चेतावनी दी कि यदि इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का कानून व्यवस्था और प्रशासन पर भरोसा और कमजोर होगा।


