ताज़ा खबरें

Copyright © 2025 swatantraawaj.com . All Right Reserved.

गढ़वा में गव्य व पशुपालन घोटाला , डीसी को पत्र लिख कर कार्रवाई की मांग

सेण्टर फॉर आरटीआई ने कार्रवाई की मांग की ,हाई कोर्ट में भी मामला को लाएंगे

गढ़वा में गव्य विभाग व पशुपालन विभाग में करोर्ड़ो के गबन ,भ्रष्टाचार और अनियमितता की बात सामने आयी है.कागजो पर ब्लड सैंपलिंग ,कोरन्टाइन, फ़र्ज़ी बिल वाउचर से निकासी जैसे कई मामले सामने आये हैं .

सेण्टर फॉर आरटीआई के अध्यक्ष पंकज कुमार यादव ने इस मामले को लेकर गढ़वा डीसी को पत्र लिखा है तथा भ्रस्टाचार में लिप्त अधिकारी ,पदाधिकारी ,चालक व वेंडर पर जाँच कर कार्रवाई की मांग की है.पंकज यादव ने अपने पत्र में लिखा है कि सेण्टर फॉर आरटीआई राज्य में भ्रस्टाचार के खिलाफ कार्य करने वाली संस्था है.

संस्था की शिकायत और पीआईएल पर सीबीआई ,ईडी ,एसीबी तथा आईटी जैसी जाँच एजेंसिया जाँच कर रही है.
मैं आपका ध्यान गढ़वा जिला के पशुपालन और गव्य विभाग के भ्रस्टाचार की ओर आकृष्ट कराना चाहता हूँ. सेण्टर फॉर आरटीआई को शिकायत मिली है कि जिला गव्य कार्यालय के अधिकारीयों एवं कर्मियों की मिलीभगत से बिना परिसम्पति के वितरण के राशि की निकासी कर ली गयी है .

2019 में बीपीएल योजना को विभागीय सचिव के रोक के बावजूद 200 से अधिक लाभुकों के नाम पर फ़र्ज़ी निकासी हुई है.सबसे पहले आवंटन के अनुरूप लाभुकों को चयन कर सूचि तैयार किया जाता है पर सभी चयनित लाभुकों को गाय खरीदी का पैसा उपलब्ध नहीं कराया जाता है ,लाभुकों को गुमराह कर फ़र्ज़ी आईडी का उपयोग कर बिचैलियों की मदद से पैसो की निकासी कर ली जाती है और लाभुकों को बोल दिया जाता है कि आपलोगो का आईडी फेल कर गया है .

गाय के वितरण से पहले गाय को कोरन्टाइन रखने का प्रावधान है पर गाय को कोरन्टाइन रखे बगैर डॉ विद्यासागर पांच प्रतिशत कमीशन लेकर कोरन्टाइन सर्टिफिकेट दे देते हैं.

इसी प्रकार गाय वितरण से पूर्व गाय का ब्लड टेस्ट करने का प्रावधान है पर जिस एजेंसी को ब्लड सैंपलिंग लेने और टेस्ट करने की जिम्मेदारी दी गयी है वो बगैर टेस्ट किये ही फर्जी टेस्ट रिपोर्ट तैयार कर देता है जिसके एवज में डॉ विद्यासागर दो प्रतिशत की कमीशन लेते हैं.

अधिकतर चयनित लाभुकों को गाय नहीं दी जाती है ,कागजी खाना -पूर्ति के लिए गव्य विकास पदाधिकारी गिरीश कुमार एडिटेड फोटो का सहारा लेकर गाय वेंडर की मिलीभगत से लाभुक की राशि निकलवाकर 20 प्रतिशत की कमीशन प्रति गाय ले लेते हैं.

गिरिस कुमार सैकड़ो लाभुकों के पे- आईडी बदलकर अपने निजी लोगो के खाते में पैसे डाइवर्ट कर लेते हैं.गव्य विकास पदाधिकारी गिरिस कुमार ने डीप बोरिंग ,वर्मी कम्पोस्ट, बाल्टी – डोर आदि में में भी फ़र्ज़ी बिल वाउचर एडिटेड फोटो का उपयोग कर लाखो की अवैध निकासी की है.

इस भ्रष्टाचार में साथ देता है गव्य विकास कार्यालय का ड्राइवर प्रमोद तिवारी जो एक दैनिक वेतन ड्राइवर है और इस कार्यालय के हर भ्रष्टाचार में इसकी संलिप्तता है .इस तरह के कई भ्रस्टाचार व अनियमितता की शिकायत पूर्व में भी लोगो ने की है पर जाँच के नाम पर छेत्रिय प्रबंधक देवनाथ चौरसिया गढ़वा आते हैं होटल ठाकुर महल या सर्किट हाउस में रुक कर मोटी रक़म लेकर वापस चले जाते हैं.

जांच के नाम पर यही प्रक्रिया प्रत्येक महीने अपनायी जाती है.इसी स्तर की अनियमितता और भ्रष्टाचार जिला पशुपालन विभाग गढ़वा में भी है. जिला पशुपालन पदाधिकारी विद्यासगर सिंह ने सिर्फ कागजों में ही सुकर ,बकरी ,मुर्गी आदि का वितरण किया है ,और चुकि कागजो में सुकर ,बकरी ,मुर्गी का वितरण हुआ है तो इनके लिए वितरण किया जाने वाला जाली का बिल भी फ़र्ज़ी बिल वाउचर जमा कर निकाला जाता है.

वित्तीय वर्ष 2020 तथा 2021 में सुकर और बकरी का इंस्युरेन्स नहीं कराया गया है .और इन्सुरेंस के पैसो की अवैध निकासी कर ली गयी.सबसे ताज्जुब वाली बात यह है कि इस विभाग का ऑडिट पिछले कई वर्षो से नहीं कराया गया है .


पत्र में लिखा गया है कि सेण्टर फॉर आरटीआई को सभी आरोपों के तथ्य व सबूत उपलब्ध कराएं गए हैं.इसलिए डीसी महोदय आमजन व किसान के रोजी रोजगार से जुड़े इस भ्रष्टाचार व अनियमितता पर जाँच कर रोक लगाने की कृपा करें.

जिससे की सरकार की बेहतरीन योजनाए आमजन तक पहुंच सके लोग इसका लाभ ले सके आत्मनिर्भर बन सके.

Tags :

मुख्य समाचार

लोकप्रिय ख़बरें

स्वतंत्र आवाज़ — आपकी आवाज़, आपके मुद्दे। देश, राज्य और स्थानीय स्तर की निष्पक्ष और विश्वसनीय खबरें, अब आपकी भाषा में।

ताज़ा खबरें

लोकप्रिय समाचार

Copyright © 2025 Swatantrawaj.com  All Right Reserved.