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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में झारखंड शराब घोटाले पर अहम सुनवाई, CBI ने जांच से किया इंकार; अगली सुनवाई अगले सप्ताह

संजीत यादव

रांची। झारखंड में हुए बहुचर्चित शराब घोटाले और उसके छत्तीसगढ़ से जुड़े कथित नेटवर्क की जांच सीबीआई से कराने की मांग पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई गुरुवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में हुई। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता विकास सिंह की ओर से दायर की गई है, जिसमें पूरे घोटाले की निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की गई है।

कोर्ट में सीबीआई डायरेक्टर का पत्र पढ़ा गया

सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश अधिवक्ता ने कोर्ट के सामने सीबीआई डायरेक्टर का पत्र प्रस्तुत किया। इस पत्र में डायरेक्टर ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस पूरे घोटाले की जांच सीबीआई द्वारा अपने स्तर से किए जाने की स्थिति में नहीं है, इसलिए एजेंसी इस जांच को अपने हाथ में नहीं ले सकती।

इस बयान के सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है, क्योंकि याचिकाकर्ता लगातार इस घोटाले की जांच को स्थानीय एजेंसियों से हटाए जाने की मांग कर रहे हैं।

कोर्ट ने पूछा— इतनी देर से याचिका लेकर क्यों पहुंचे?

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से यह सवाल भी किया कि आखिर वे इतनी देर से याचिका लेकर कोर्ट क्यों पहुंचे और याचिका दाखिल करने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं।इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने बताया कि झारखंड की एसीबी (ACB) इस घोटाले की जांच कर रही है, लेकिन जांच में गंभीर कमियां हैं। कई मामलों में जांच की गति बेहद धीमी है और लापरवाही के कारण कई आरोपी गिरफ्तारी से बच निकल रहे हैं।

“अंतर्राज्यीय मामला, इसलिए सीबीआई से जांच जरूरी”

अधिवक्ता ने कहा कि शराब घोटाले का दायरा झारखंड से छत्तीसगढ़ तक फैला हुआ है और यह स्पष्ट रूप से अंतर्राज्यीय प्रकृति का मामला है। ऐसे मामलों में किसी राज्य की एजेंसी द्वारा निष्पक्ष जांच संभव नहीं होती, इसलिए सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी से जांच अनिवार्य है। उन्होंने यह भी दावा किया कि झारखंड सरकार भी इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं चाहती, जिसके कारण भी घोटाले की तह तक पहुंचने में बाधाएं पैदा हो रही हैं।

छत्तीसगढ़ में भी दर्ज है मामला

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने छत्तीसगढ़ में भी पूर्व अधिकारी विनय चौबे के खिलाफ आवेदन देकर FIR दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि यह घोटाला कई राज्यों को जोड़ता है और कई प्रशासनिक व राजनीतिक स्तर पर सक्रिय नेटवर्क की भूमिका सामने आने की संभावना है। इसलिए मामले की व्यापक और स्वतंत्र जांच CBI के माध्यम से ही संभव है।

अगली सुनवाई अगले सप्ताह

कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की है। अगली तारीख पर यह स्पष्ट हो सकता है कि क्या अदालत इस मामले को किसी अन्य केंद्रीय एजेंसी के हवाले करने पर विचार करेगी या राज्य एजेंसी की जांच को ही आगे बढ़ाने के निर्देश देगी।

यह मामला झारखंड और छत्तीसगढ़—दोनों राज्यों की राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल के केंद्र में बना हुआ है। घोटाले में कई प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम सामने आने की संभावना के कारण इसकी कानूनी प्रक्रिया पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं।

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