
चाईबासा : सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने और यातायात को सुचारू बनाने के उद्देश्य से चाईबासा प्रशासन ने भारी वाहनों के लिए लागू ‘नो-एंट्री’ नियम में संशोधन किया था। इस कदम के बाद सड़क हादसों में कमी आई है। लेकिन अब यही निर्णय विवाद का कारण बन गया है ,कुछ ग्रामीण और राजनीतिक कार्यकर्ता इस फैसले के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों ने जगाई थी चिंता
2023 और 2024 में चाईबासा से हाटगम्हरिया राष्ट्रीय मार्ग और बाईपास सड़क पर लगातार हादसे हो रहे थे। सड़क किनारे खड़े ट्रकों से टकराने की घटनाएं आम हो गई थीं। जाम की स्थिति से एम्बुलेंस और स्कूली वाहन भी प्रभावित होते थे।कई बार हादसे में मौतें भी हुईं, जिससे प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसी को ध्यान में रखते हुए दिसंबर 2024 में ‘नो-एंट्री’ समय में संशोधन किया गया।
संशोधित आदेश — हादसों पर लगाम लगाने की दिशा में कदम
प्रशासन ने पहले की लंबी अवधि की नो-एंट्री को घटाकर वैज्ञानिक तरीके से विभाजित समय तय किया ,मार्ग प्रवेश
समय नो-एंट्री अवधिकुजू पुल → सिंहपोखरिया 9:30 AM – 11:00 AM
—सिंहपोखरिया → कुजू पुल 11:00 AM – 12:30 PM
शहर व बाईपास क्षेत्र 9:00 PM – 6:00 AM (भारी वाहनों को केवल इसी समय प्रवेश की अनुमति) दिन में नो-एंट्री लागू
यह बदलाव दुर्घटनाओं की रोकथाम, स्कूली बच्चों की सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन को ध्यान में रखकर किया गया था।
सकारात्मक असर — मौतों में आई भारी कमी
संशोधित नियमों के लागू होने के बाद प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार सड़क मार्ग 2024 में मौतें 2025 में (अभी तक) मौतें NH-220 (कुजू पुल–बाईपास चौक) 8
MDR-177 (बाईपास–गितिल्पी चौक) 7
यानी सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में 60% से अधिक की कमी दर्ज की गई है। यह साफ संकेत है कि नया नियम दुर्घटना रोकथाम में प्रभावी साबित हो रहा है।
अब धरना-प्रदर्शन — “नो-एंट्री से बढ़ी परेशानी”
वहीं दूसरी ओर, कुछ ग्रामीण और स्थानीय व्यापारी इस नियम के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि नो-एंट्री के कारण व्यापार प्रभावित हो रहा है। ट्रक चालकों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। और स्थानीय लोगों की आवाजाही पर भी असर पड़ा है। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीण और भाजपा समर्थक कार्यकर्ता इन दिनों चाईबासा में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि “पुराना नो-एंट्री नियम बहाल किया जाए” या समय में स्थानीय सुविधा के अनुसार संशोधन किया जाए।
प्रशासन का पक्ष — “जनहित में लिया गया निर्णय”प्रशासन ने साफ किया है कि ‘नो-एंट्री’ में किया गया संशोधन पूरी तरह जनहित और सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक था।
सदर एसडीओ कार्यालय से जारी बयान में कहा गया: “यह कदम दुर्घटनाओं की रोकथाम और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। विरोध करने वालों से संवाद जारी है, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।”
–भविष्य की योजना — 550 करोड़ की रिंग रोड परियोजना
जिला प्रशासन ने यातायात की स्थायी समस्या का समाधान निकालने के लिए 18 किमी लंबी रिंग रोड (बाईपास) की योजना भी तैयार की है।लागत: ₹550 करोड़उद्देश्य: भारी वाहनों को शहर से बाहर डायवर्ट करना ताकि जाम और दुर्घटनाओं से पूर्ण मुक्ति मिल सके।
दुर्घटनाओं की रोकथाम के उद्देश्य से लागू किए गए ‘नो-एंट्री’
संशोधन में सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता दिलाई है। हालांकि, धरना-प्रदर्शन यह भी दिखाता है कि ऐसे निर्णयों में स्थानीय जनसंवाद और जनसहभागिता की भूमिका अहम होती है। प्रशासन के लिए अब चुनौती यह है कि सुरक्षा और सुविधा दोनों के बीच संतुलन बनाए रखे।
