रांची / बोकारो।
झारखंड में पारिवारिक विश्वास को तोड़ने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक भाई पर अपने ही सगे भाई की नौकरी जालसाजी और कागजी हेराफेरी के माध्यम से हड़प लेने का आरोप लगा है। पीड़ित रामचंद्र प्रजापति ने कई वर्षों तक सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के चक्कर लगाए, लेकिन उन्हें कहीं से भी न्याय नहीं मिला। अंततः थक-हारकर उन्होंने अपने भाई गुलाब प्रजापति और सीसीएल प्रबंधन को प्रतिवादी बनाते हुए झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है।
पीड़ित का दावा है कि सीसीएल प्रबंधन मौखिक रूप से यह स्वीकार करता रहा है कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है, लेकिन आज तक इस संबंध में कोई लिखित निर्णय या ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
जमीन अधिग्रहण से शुरू हुआ मामला
रामचंद्र प्रजापति (पिता – किनु कुम्हार), ग्राम ढेन्धे, पोस्ट – होसिर, थाना – गोमिया, जिला – बोकारो (झारखंड) के निवासी हैं। उन्होंने अपने आवेदन में बताया कि उनके नाना स्वर्गीय पूरन महतो, पिता गाजो महतो, ग्राम लहरियाटांड, पोस्ट गोविंदपुर, थाना बोकारो थर्मल, जिला बोकारो के निवासी थे।
स्वर्गीय पूरन महतो के नाम मौजा गोविंदपुर में खाता संख्या 91, प्लॉट संख्या 103, कुल रकबा लगभग 2 एकड़ भूमि रजिस्ट्री केवाला के माध्यम से दर्ज थी। वर्ष 1984 में इस जमीन को सीसीएल प्रबंधन ने अन्य रैयतों के साथ अधिग्रहित कर लिया था। भूमि अधिग्रहण के बदले विस्थापित परिवार को मुआवजे के साथ-साथ एक सदस्य को नौकरी देने का प्रस्ताव दिया गया था।
नाना की असमर्थता के कारण रामचंद्र को मिलनी थी नौकरी
रामचंद्र के अनुसार, उस समय उनके नाना अत्यधिक वृद्ध और शारीरिक रूप से कमजोर थे तथा नौकरी करने की स्थिति में नहीं थे। उनके दोनों पुत्र पहले से डीवीसी बोकारो थर्मल में कार्यरत थे। ऐसे में परिवार ने यह निर्णय लिया कि सीसीएल द्वारा दी जा रही नौकरी रामचंद्र प्रजापति को दी जाए।
परिवार की सहमति से रामचंद्र को नौकरी मिलनी तय थी, लेकिन इसी बीच कथित रूप से उनके छोटे भाई गुलाब प्रजापति ने साजिश रच दी।
फर्जी दस्तावेज बनाकर नौकरी लेने का आरोप
रामचंद्र का आरोप है कि गुलाब प्रजापति ने बिना उनकी जानकारी के उनके नाम का गलत इस्तेमाल करते हुए जालसाजी, धोखाधड़ी और कागजी हेराफेरी की। आरोप के अनुसार, गुलाब ने अपने नाम को गौण रखते हुए सभी दस्तावेज रामचंद्र प्रजापति के नाम से बनवाए, जिनमें आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, राशन कार्ड जैसे पहचान पत्र शामिल हैं।
इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर गुलाब प्रजापति ने सीसीएल की गोविंदपुर कोलियरी परियोजना में नौकरी प्राप्त कर ली और वर्षों तक उसी पद पर कार्य करता रहा।
शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
जब रामचंद्र को इस धोखाधड़ी की जानकारी मिली तो उन्होंने तत्काल सीसीएल के महाप्रबंधक और अन्य संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत दी। इसके अलावा उन्होंने मुख्य सतर्कता अधिकारी, सतर्कता विभाग, सीसीएल, दरभंगा हाउस, रांची को भी विस्तृत पत्र भेजकर पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि उनके नाम और पहचान का दुरुपयोग कर नौकरी हासिल की गई है। बावजूद इसके, अब तक कोई ठोस जांच रिपोर्ट या विभागीय कार्रवाई सामने नहीं आई है।
रामचंद्र का कहना है कि उन्हें कई बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।
हाईकोर्ट में पहुंचा मामला
लगातार न्याय न मिलने से निराश होकर रामचंद्र प्रजापति ने अपने भाई गुलाब प्रजापति तथा सीसीएल प्रबंधन को प्रतिवादी बनाते हुए झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की है। उन्होंने न्यायालय से निष्पक्ष जांच, फर्जी दस्तावेजों की जांच, दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई और उन्हें उनका वैध अधिकार दिलाने की मांग की है।
पीड़ित का कहना है कि वह आर्थिक रूप से कमजोर हैं और वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं।
प्रबंधन का पक्ष
सूत्रों के अनुसार, सीसीएल प्रबंधन मौखिक रूप से यह स्वीकार करता रहा है कि मामले में अनियमितता हुई है, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक लिखित बयान या कार्रवाई सामने नहीं आई है।

