रांची : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार पर म्यूटेशन प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए फेसबुक पर एक तीखा पोस्ट साझा किया है। मरांडी ने अपने पोस्ट में कहा कि झारभूमि पोर्टल का डाटा स्टेट डाटा सेंटर में ट्रांसफर कर दिया गया है, लेकिन पोर्टल पर आवेदन खोलने में ही 15–20 मिनट का समय लग रहा है। उन्होंने इसे सरकार की “नई कारस्तानी” बताया।उन्होंने रांची जिले में लगभग 18,000 म्यूटेशन मामलों के लंबित होने की बात भी उठाई। मरांडी का कहना है कि इतनी लंबितियां धीमे इंटरनेट के कारण नहीं हैं, बल्कि CO (प्रशासनिक अधिकारी) द्वारा मोटी रकम या जमीन का हिस्सा न देने की वजह से मामले रुके हैं। मरांडी ने कटाक्ष करते हुए सुझाव दिया कि यदि सरकार चाहे तो नए नियम बनाए जा सकते हैं, जिसके तहत पुश्तैनी जमीन का बँटवारा सिर्फ पारिवारिक हकदारों (गोतिया) के बीच ही नहीं, बल्कि “सीएम और CO (सरकारी हकदारों)” के बीच भी किया जा सके। उनके अनुसार, इससे सरकार तक पहुँचने वाला काला धन वैध हो जाएगा और गरीब जनता को म्यूटेशन के लिए अंचल कार्यालय में चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी। मरांडी के इस पोस्ट ने सरकार और जिला प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन समय पर और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करता है, तो इसका खामियाजा सीधे जनता को भुगतना पड़ेगा।


