संजीत यादव

रांची: भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करने के लिए झारखंड सरकार और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) लगातार अभियानों का दावा करती है, लेकिन आम लोगों की शिकायतें सुनने के लिए उपलब्ध कराए गए आधिकारिक नंबर की स्थिति ही सवालों के घेरे में है। झारखंड पुलिस की ऑफिशल वेबसाइट पर जारी ACB का हेल्पलाइन नंबर लंबे समय से इनएक्टिव बताया जा रहा है।
इससे उन लोगों को भारी परेशानी हो रही है, जो किसी भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायत तुरंत दर्ज कराना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार, यह नंबर कई दिनों से लगातार “स्विच ऑफ”, “नॉट रीचेबल” या “कनेक्ट न होने” जैसी स्थिति में बना हुआ है। कई शिकायतकर्ताओं ने यह भी बताया कि उन्होंने घंटों प्रयास किया, लेकिन कॉल रिसीव तो दूर, नंबर नेटवर्क तक नहीं पकड़ रहा। सोशल मीडिया पर भी लोग इस समस्या को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि जब एसीबी जैसी महत्वपूर्ण संस्था का हेल्पलाइन ही काम न करे, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कैसे मजबूती से लड़ी जा सकती है।
राज्य में पिछले कुछ महीनों से लगातार कई बड़े मामले सामने आए हैं—अवैध संपत्ति, रिश्वतखोरी, ट्रांसफर-पोस्टिंग में गड़बड़ी, जमीन माफिया और कोयला कारोबार से जुड़े भ्रष्टाचार की जांच—इन सबके बीच ACB हेल्पलाइन का इनएक्टिव होना एक गंभीर चूक माना जा रहा है। आमतौर पर लोग सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार, अवैध वसूली या जबरन वसूली की शिकायत इसी नंबर पर करते थे, ताकि तत्काल कार्रवाई की उम्मीद की जा सके।
सरकारी वेबसाइट पर मौजूद यह इनएक्टिव नंबर पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा करता है। कुछ लोगों का कहना है कि यदि किसी राज्य में एंटी करप्शन हेल्पलाइन ही ठप हो जाए, तो यह भ्रष्टाचारियों के मनोबल को बढ़ाने वाला कदम साबित हो सकता है। वहीं शिकायतकर्ता अपना वीडियो, प्रमाण या दस्तावेज किस माध्यम से भेजें, यह भी स्पष्ट नहीं है।
हालांकि, एसीबी अधिकारियों की ओर से इस पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन शिकायतकर्ताओं की मांग है कि सरकार तत्काल प्रभाव से हेल्पलाइन को सक्रिय कराए, वैकल्पिक नंबर जारी करे या एक मल्टी-चैनल शिकायत प्रणाली लागू करे, जहाँ कॉल के साथ-साथ WhatsApp, ईमेल और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज की जा सके।
झारखंड जैसे संवेदनशील और संसाधन-समृद्ध राज्य में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए एसीबी का सक्रिय रहना बेहद जरूरी है। इसलिए ACB हेल्पलाइन की निष्क्रियता को जल्द दूर करना सरकार और एजेंसी—दोनों की प्राथमिकता होनी चाहिए।


