रांची: झारखंड में माओवादी विरोधी अभियान के लिए विभिन्न जिलों में तैनात अतिरिक्त बलों को हटाने पर विचार शुरू हो गया है। डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर गठित चार सदस्यीय समिति यह तय करेगी कि किन क्षेत्रों में वास्तव में बल की जरूरत है और कहाँ नहीं।
समिति का नेतृत्व झारखंड जगुआर के आईजी अनूप बिरथरे कर रहे हैं। इनके साथ डीआईजी इंद्रजीत महथा, डीआईजी कार्तिक एस. और एसआईबी के एसपी सदस्य हैं। यह टीम संबंधित जिलों के जोनल IG, DIG, SSP-SP के साथ-साथ CRPF व SSB अधिकारियों से समन्वय कर बल की वास्तविक आवश्यकता का आकलन करेगी।
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 15 अक्टूबर को पाँच जिलों को SRE सूची से हटाने के बाद केंद्र ने झारखंड में तैनात CRPF की दो व SSB की एक बटालियन को अन्य राज्यों में भेजने का प्रस्ताव भेजा है। इसी के मद्देनजर समिति को बल की जरूरत की समीक्षा का काम सौंपा गया है।
समिति नक्सल गतिविधि, अपराध और विधि-व्यवस्था को आधार बनाकर
• पोस्ट/पिकेट में तैनात बलों की संख्या
• अनावश्यक पिकेट/पोस्ट की पहचान
वर्तमान प्रतिनियुक्ति की जरूरत की रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे बल हटाने पर अंतिम निर्णय होगा।
इधर पुलिस मुख्यालय ने अपने सभी शाखाओं से भी यह जानकारी मांगी है कि उनके अधीन कितने प्रतिनियुक्त अधिकारी-कर्मी वास्तव में आवश्यक हैं। जिनकी जरूरत नहीं है, उन्हें उनके मूल जिले या इकाई में भेजने का निर्देश दिया गया है। सभी शाखाओं से दो दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।


