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बोकारो में बड़ी कार्रवाई: थानेदार समेत 28 पुलिसकर्मी सस्पेंड, अपहरण-हत्या केस में मिलीभगत के आरोप

बोकारो। झारखंड के बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 18 वर्षीय युवती पुष्पा महतो के अपहरण और हत्या केस में लापरवाही व संदिग्ध भूमिका को लेकर पुलिस विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए थानेदार से लेकर सिपाही तक कुल 28 पुलिसकर्मियों को एक साथ निलंबित कर दिया है।

🔎 जांच में खुली पोल, पुलिस पर ही सवाल
एसपी हरविंदर सिंह के अनुसार जांच के दौरान कई पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मी आरोपी को बचाने की कोशिश कर रहे थे, जिससे न केवल जांच प्रभावित हुई बल्कि विभाग की छवि भी धूमिल हुई।

📅 शिकायत से केस दर्ज होने तक हुई देरी
जानकारी के मुताबिक, 24 जुलाई 2025 को खूंटाडीह गांव की रेखा देवी ने अपनी 18 वर्षीय बेटी के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन पुलिस की शुरुआती कार्रवाई धीमी रही। बाद में 4 अगस्त को अज्ञात आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया गया।

⚠️ SIT की जांच पर भी उठे सवाल
मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित SIT टीम की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हुए। रिपोर्ट में कहा गया कि कई अधिकारियों ने वरिष्ठ निर्देशों का पालन नहीं किया और जांच को कमजोर करने की कोशिश की।

🚨 नई टीम ने एक दिन में किया खुलासा
स्थिति बिगड़ने पर नई जांच टीम गठित की गई, जिसका नेतृत्व नगर डीएसपी आलोक रंजन को सौंपा गया। इस टीम ने महज एक दिन में पूरे मामले का खुलासा कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

🧾 आरोपी की निशानदेही पर मिले अहम सबूत
गिरफ्तार आरोपी के बयान के आधार पर पुलिस ने युवती से जुड़े कई अहम साक्ष्य बरामद किए, जिनमें—

  • कंकाल और हड्डियां
  • पहने हुए कपड़े
  • हत्या में इस्तेमाल चाकू

इन बरामदगी के बाद हत्या की पुष्टि हो गई।

💰 लेनदेन और पार्टी की भी चर्चा
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ पुलिसकर्मियों पर आरोपी को बचाने के लिए पैसे लेने और उसके साथ पार्टी करने तक के आरोप लगे हैं। इससे पूरे विभाग की साख पर सवाल उठ गए हैं।

📊 एक नजर में कार्रवाई

  • एसआई: 10
  • एएसआई: 5
  • हवलदार: 2
  • सिपाही: 11
    👉 कुल निलंबित: 28 पुलिसकर्मी

सभी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर सामान्य जीवन-यापन भत्ता पर रखा गया है।

🗣️ सख्त संदेश
एसपी हरविंदर सिंह ने स्पष्ट कहा कि दोषी पुलिसकर्मियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। जरूरत पड़ी तो आगे और भी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने पुलिस व्यवस्था और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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