✍️ संवाददाता | रांची
Jharkhand में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया टेंडर के पेंच में फंस जाने से राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले करीब आठ महीनों से यह स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण करोड़ों रुपये की आय पर असर पड़ा है।
राजधानी Ranchi में ही प्रतिदिन लगभग 500 हाइवा बालू की खपत का अनुमान है। यदि प्रति हाइवा 40 टन के हिसाब से गणना की जाए, तो रोजाना करीब 20 हजार टन बालू की खपत हो रही है। वहीं पूरे राज्य में यह आंकड़ा ढाई से तीन लाख टन प्रतिदिन से भी अधिक बताया जा रहा है। इसके बावजूद सरकार को राजस्व के रूप में कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
⚠️ 444 में से 298 घाटों पर ही पूरी हुई प्रक्रिया
राज्य में बालू घाटों को Jharkhand State Mineral Development Corporation से वापस लेने के बाद अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुल 444 घाटों में से 298 घाटों पर ऑक्शन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि 146 घाटों के लिए प्रक्रिया अभी भी जारी है। जिन घाटों पर ऑक्शन पूरा हो चुका है, वहां पर्यावरणीय स्वीकृति और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं लंबित हैं।
🏢 उपायुक्त स्तर पर अटकी प्रक्रिया
खान निदेशालय द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश जिलों के उपायुक्तों को दिए गए हैं। इसके बावजूद जिलों में प्रशासनिक स्तर पर फाइलें अटकी हुई हैं, जिससे बालू घाटों का संचालन शुरू नहीं हो पा रहा है।
🌾 ग्राम सभा को मिला अधिकार
राज्य में पेसा नियमावली के तहत पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्र वाले बालू घाट (कैटेगरी-1) पर ग्राम सभा का पूर्ण अधिकार है। इन घाटों से ग्रामीण स्थानीय उपयोग के लिए बिना किसी टैक्स या रॉयल्टी के बालू का उठाव कर सकते हैं।
हालांकि, इसका उपयोग केवल घरेलू, सामुदायिक और सरकारी योजनाओं तक ही सीमित है।
