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ईरान पर अमेरिकी कार्रवाई तेज, ट्रंप बोले—‘नौसेना और वायुसेना तबाह, लक्ष्य हासिल करने के करीब’

मिडिल ईस्ट जंग का 34वां दिन, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अमेरिका का बड़ा दावा
वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 2 अप्रैल


मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का आज 34वां दिन है। भारतीय समयानुसार 2 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी। अपने संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया है।

राष्ट्र के नाम संबोधन में ट्रंप ने कहा कि “आज रात ईरान की नौसेना पूरी तरह नष्ट हो चुकी है और उसकी वायु सेना भी तबाह हो गई है।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का नेतृत्व कमजोर पड़ चुका है और उसके नियंत्रण में चल रहा आतंकवादी ढांचा तेजी से खत्म हो रहा है।

ट्रंप के मुताबिक, Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) पर ईरान की पकड़ भी अब कमजोर हो रही है और उसकी कमान बिखरती जा रही है।


‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत कार्रवाई

अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अमेरिका के उद्देश्य स्पष्ट हैं—ईरान की उस क्षमता को खत्म करना, जिससे वह अमेरिका को धमकी दे सके या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर सके।

उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत ईरान की नौसेना को समाप्त कर दिया गया है, वायु सेना और मिसाइल कार्यक्रम को अभूतपूर्व नुकसान पहुंचाया गया है, जबकि उसके रक्षा औद्योगिक ढांचे को भी गंभीर रूप से ध्वस्त किया गया है।


ईरान की सैन्य ताकत हुई कमजोर

ट्रंप ने दावा किया कि इन कार्रवाइयों के बाद ईरान की सेना लगभग पंगु हो चुकी है। इसके साथ ही आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने की उसकी क्षमता भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ने से रोक दिया गया है।


अमेरिकी सेना की तारीफ, शहीदों को किया याद

राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी सशस्त्र बलों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि “सैन्य दृष्टि से ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।” उन्होंने कहा कि दुनिया भर में इस ऑपरेशन की चर्चा हो रही है और अमेरिका अपने प्रमुख रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के करीब है।

संबोधन के अंत में ट्रंप ने उन 13 अमेरिकी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने इस संघर्ष में अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि इन सैनिकों ने आने वाली पीढ़ियों को एक परमाणु शक्ति से लैस ईरान के खतरे से बचाने के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है।

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