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पार्ट–2: कौन चला रहा है अवैध कोयले का नेटवर्क? अंदर की पूरी चेन


धनबाद
धनबाद जिले में फल-फूल रहा अवैध कोयला कारोबार अब सिर्फ चोरी या तस्करी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है। स्थानीय सूत्रों और क्षेत्रीय जानकारों की मानें तो इस पूरे खेल के पीछे एक मजबूत चेन सिस्टम काम कर रहा है, जिसमें खनन से लेकर ढुलाई और खपत तक हर स्तर पर अलग-अलग किरदार सक्रिय हैं।

कैसे चलता है अवैध कोयले का पूरा खेल?

सूत्र बताते हैं कि सबसे निचले स्तर पर बाहर से बुलाए गए मजदूर होते हैं, जिन्हें बेहद कम मजदूरी पर जान जोखिम में डालकर अवैध खदानों में उतारा जाता है। ये मजदूर दिन और रात, दोनों समय कोयले की कटाई करते हैं। कई बार खदान धंसने की घटनाओं में मजदूरों की मौत तक हो जाती है, लेकिन ऐसे मामलों को दबा दिया जाता है।
इसके बाद दूसरा स्तर आता है लोकल मैनेजरों और ठेकेदारों का, जो खदानों से कोयला बाहर निकलवाने और उसे सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालते हैं। साइकिल, मोटरसाइकिल, पिकअप वैन और ट्रकों के जरिए कोयले की ढुलाई की जाती है।

रूट, टाइमिंग और सिस्टम सब फिक्स!

स्थानीय लोगों का दावा है कि कोयला ढुलाई के लिए समय और रास्ते पहले से तय रहते हैं।
रात के अंधेरे में और तड़के सुबह कोयला लदा वाहन थाना क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। तेतुलमारी थाना के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे इन गतिविधियों के गवाह हैं,

लेकिन सवाल यह है कि—
क्या कैमरे सिर्फ दिखावे के लिए हैं या फिर कार्रवाई के लिए?
यदि कैमरे सब कुछ रिकॉर्ड कर रहे हैं, तो अब तक किसी बड़े नेटवर्क का खुलासा क्यों नहीं हुआ?


बोरागढ़–धर्माबंध: तस्करी का नया हब?

बोरागढ़ और धर्माबंध इलाके को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारियाँ सामने आ रही हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यहां से रोजाना दो ट्रक अवैध कोयला बिहार भेजा जा रहा है।
इतना ही नहीं, तस्करों द्वारा नदी के प्राकृतिक बहाव में कथित तौर पर बदलाव कर लोडिंग और आवाजाही को आसान बना लिया गया है। इससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस और CISF की भूमिका पर सवाल
सबसे गंभीर सवाल सुरक्षा एजेंसियों को लेकर खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि—
पुलिस को सब कुछ पता होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होती,‌ CISF की तैनाती वाले कोयला क्षेत्रों से भी अवैध कोयला निकल रहा है.
ऐसे में सवाल उठता है कि—
क्या यह चुप्पी लापरवाही है या किसी और कहानी की ओर इशारा करती है?


पहले भी हुआ था विरोध, फिर क्यों सन्नाटा?
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले तेतुलमारी थाना के पास ग्रामीणों ने अवैध कोयला कारोबार के खिलाफ सड़क पर उतरकर आंदोलन किया था। उस वक्त प्रशासन ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया था, लेकिन आज हालात और भी बदतर नजर आ रहे हैं।


बड़ा सवाल अब भी कायम

• धनबाद में अवैध कोयला कारोबार आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है?
• कौन हैं वे लोग जो इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं?
• और कब टूटेगी यह अवैध चेन?

अब निगाहें प्रशासन, पुलिस और संबंधित एजेंसियों पर टिकी हैं।
क्योंकि अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सवाल और गहरा होगा कि कानून का डर आखिर किसे है और किसे नहीं।

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