रांची। 34वें राष्ट्रीय खेल घोटाला मामले में आज सीबीआई के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शिकायतकर्ता पंकज यादव के अधिवक्ता को शपथपत्र (एफिडेविट) के माध्यम से अपना अंतिम पक्ष रखने का अवसर दिया था।
साथ ही अदालत ने यह भी जानना चाहा था कि किन-किन आरोपियों के विरुद्ध आरोप सिद्ध हो रहे हैं।शिकायतकर्ता पंकज यादव ने सीबीआई द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देते हुए शपथपत्र दाखिल किया। शपथपत्र में आरोप लगाया गया है कि सीबीआई ने पुनः जांच के दौरान भी घोर लापरवाही बरती है। पंकज यादव का कहना है कि सीबीआई ने पुराने जांच अधिकारी (आईओ) को ही दोबारा जांच का जिम्मा सौंप दिया, जिससे निष्पक्ष जांच पर सवाल खड़े होते हैं।शपथपत्र में यह भी कहा गया है कि स्पोर्ट्स मेगा कॉम्प्लेक्स के निर्माण से जुड़ी उस निर्माण कंपनी से किसी प्रकार की पूछताछ नहीं की गई, जिसका वर्तमान में कोई अस्तित्व भी नहीं है।
इसके अलावा टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितता बरतने वाले तत्कालीन मंत्री सुदेश महतो, उनके साथ विदेश यात्रा पर गए तत्कालीन आप्त सचिव गोपाल जी तिवारी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों से भी सीबीआई ने पूछताछ नहीं की।
पंकज यादव ने आरोप लगाया कि पांच गुना से अधिक दर पर खेल सामग्री की खरीद करने वाले तत्कालीन डीजीपी से भी कोई पूछताछ नहीं की गई। उन्होंने कहा कि मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण से लेकर राष्ट्रीय खेलों के आयोजन हेतु खरीदे गए उपकरणों तक में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार हुआ है।
शिकायतकर्ता के अनुसार जहां 240 करोड़ रुपये के खेल आयोजन को बढ़ाकर 434 करोड़ रुपये में कराया गया, वहीं टेंडर प्रक्रिया से लेकर वर्तमान में उसके रखरखाव (मेंटेनेंस) तक भ्रष्टाचार व्याप्त रहा है। पंकज यादव ने यह भी कहा कि झारखंड विजिलेंस ब्यूरो इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, ऐसे में सीबीआई को जांच में कुछ भी न मिलना आश्चर्यजनक है।
पंकज यादव ने संकेत दिया कि वे इस मामले को लेकर हाईकोर्ट का रुख भी कर सकते हैं। अदालत ने सीबीआई को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 5 फरवरी तक का समय दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सीबीआई तय समय सीमा में क्या जवाब पेश करती है।

