रांची। नशे के खिलाफ कार्रवाई के दावों के बीच राजधानी के नामकुम थाना क्षेत्र से पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आई है। डोडा चूर्ण जब्ती मामले में सबूतों के नष्ट हो जाने और कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन के कारण अदालत ने दो आरोपियों को बरी कर दिया है।मामला नामकुम थाना कांड संख्या 161/2019 से जुड़ा है।
पुलिस के अनुसार, 31 मई 2019 को गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर कार्तिक महतो और चुरू लोहरा को गिरफ्तार किया गया था। दावा किया गया कि उनके पास से 45 बोरी डोडा चूर्ण, एक पिकअप वाहन और दो बाइक जब्त की गईं। कुल वजन 675 से 836 किलो बताया गया।
हालांकि अदालत में यह सामने आया कि जब्त डोडा खुले में रखा गया, जिससे वह नष्ट हो गया। एफएसएल सैंपल के प्लास्टिक बॉक्स तक चूहों ने कुतर दिए। चार में से केवल एक बॉक्स पर सील पाई गई। गवाहों के बयानों में वजन, जब्ती और गिरफ्तारी समय को लेकर गंभीर विरोधाभास पाए गए।
साथ ही एनडीपीएस एक्ट की धारा 42 का पालन नहीं हुआ और कोई स्वतंत्र गवाह भी शामिल नहीं था। इन खामियों के आधार पर अदालत ने 16 अक्टूबर 2025 को फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन आरोप साबित करने में विफल रहा है। सबूत संदेहास्पद पाए गए, इसलिए दोनों आरोपियों को बरी किया जाता है।
यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि यदि जब्त मादक पदार्थों की सही सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं होगा, तो नशे के खिलाफ कार्रवाई कितनी प्रभावी रह पाएगी।


