कतरास: तोपचांची प्रखंड अंतर्गत सिंहदाहा पंचायत में पंचायत भवन के समीप एक पैक्स भवन बनाया जा रहा है। दीवारें खड़ी हो चुकी हैं। निर्माण कार्य अभी भी जारी है। अर्धनिर्मित भवन के सामने बंगला भट्ठा की हजारों ईंटें पड़ी हुई है।
मंगलवार को पंचायत के लोगों ने ठिकेदार पर निर्माण कार्य में बांग्ला भट्ठा की ईंटें लगाने एवं अन्य घटिया सामग्री इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। घटिया सामग्री के इस्तेमाल पर आक्रोश व्यक्त करते हुए पंसस प्रतिनिधि ललित कुमार दास, उपमुखिया प्रतिनिधि बिनोद गोप, सिंहदाहा पंचायत निवासी ब्रजेश पाण्डेय एवं अन्य कई लोगों ने कहा था कि ठेकेदार के द्वारा एक तो बिना एस्टीमेट के काम किया जा रहा है।
उपर से बंगला भट्ठा का ईंट सहित अन्य घटिया सामाग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसको लेकर स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि हरिचरण दास को सूचना भी दे दी गई है। मुखिया ने कहा है कि सम्बन्धित विभाग में शिकायत कीजिए।
मामले को लेकर बुधवार को सिंहदाहा पंचायत भवन के सामने ठिकेदार के मुंशी, स्थानीय मुखिया, एवं दर्जनों ग्रामीणों के बीच बैठक हुई। बैठक के दौरान स्थानीय ग्रामीण बृजेश कुमार पांडे ने कहा कि घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर पैक्स भवन का निर्माण कराया जा रहा है। इसको लेकर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। आपसी समझौता किया जा रहा है।

बंगला भट्ठा ईंट को हटा कर चिमनी ईंट लगाया जाएगा – मो शहजाद (मुंशी)
बैठक के दौरान मौजूद ठेकेदार के मुंशी मोहम्मद शहजाद ने इस बात को स्वीकार किया कि निर्माण कार्य में बांग्ला भट्ठा के ईंट का प्रयोग किया जा रहा है। वहीं उन्होंने कहा कि चूंकि आम ग्रामीणों को आपत्ति है इसलिए बांग्ला भट्टी की ईट को हटाया जाएगा और चिमनी ईंटों का प्रयोग किया जाएगा। जब उससे पूछा कि जो दीवारों बांग्ला भट्ठा की ईंट से जोड़कर बनाई गई है क्या उसे दीवार को भी तोड़ा जाएगा इस पर उन्होंने स्पष्ट जवाब देते हुए कहा कि जो बन गया है उसको तोड़ना तो मुश्किल हैं, फिर भी देखते हैं। उन्होंने बताया कि पूरा जानकारी ठिकेदार मो जावेद को है।
निर्माण कार्य को लेकर मुखिया प्रतिनिधि ने कहा सरकारी काम मिलाजुला कर होता है
इस संबंध में स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि हरिचरण दास ने कहा कि मैं नहीं मानता हूं कि घटिया निर्माण हुआ है। क्योंकि पूरा निर्माण मेरे सामने ही हुआ है। थोड़ा बहुत बांग्ला भट्ट ईंट का प्रयोग किया गया है। लेकिन सरकारी काम मिला-जुला कर ही होता है। विरोध का वजह पूछने पर उन्होंने बताया कि आपसी विवाद के कारण ही निर्माण कार्य का विरोध हो रहा है।
पूछने पर कहा कि ना तो मुझे इसकी प्राक्कलित राशि का पता है ना ही एस्टीमेट का। मुझे विकास से मतलब है, मैं विकास विरोधी नहीं हूं। हालांकि अंत में उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अच्छा होना चाहिए।
कई बार कॉल करने पर भी इंजीनियर ने फोन नहीं उठाया
संबंधित मामले को लेकर जब इंजीनियर अनमोल राज को फोन लगाया गया तो घंटियां बजती रही लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
क्या समझौता से बदलेगा निर्माण की नींव, बंग्ला भट्ठा ईंट बनेगा चिमनी?
जहां पहले दिन ग्रामीण बांग्ला भट्ठा ईंट का प्रयोग करने को लेकर ठेकेदार पर आरोप लगाते दिखे वहीं दूसरे दिन वहीं ग्रामीण और वही ठेकेदार के लोग आपसी समझौता कर बांग्ला भट्ठे की ईट को चिमनी बनाने की पुरजोर कोशिश करते दिखे। हालांकि खबर लिखे जाने तक समझौता नहीं हो पाया था। लेकिन यह सोचने वाली बात है कि आखिर ऐसा कौन सा समझौता होगा जिससे बांग्ला भट्ठा का ईट बदलकर चिमनी में तब्दील हो जाएगा और नाराज ग्रामीणों को कोई आपत्ति नहीं होगी। इस पूरे प्रकरण में संबंधित इंजीनियरया सरकारी अधिकारी का कोई बयान नहीं आना कई सवाल खड़े कर रहे हैं। क्या संबंधित सरकारी इंजीनियर भी बांग्ला भट्ठे की ईंट को चिमनी में बदलते देखना चाहते हैं या फिर घटिया सामग्री को हटाकर गुणवत्ता युक्त सामग्री का इस्तेमाल करेंगे?


