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झारखंड कांग्रेस में बढ़ती गुटबाज़ी से हाईकमान चिंतित, दिल्ली में बुलाई जाएगी समन्वय बैठक

रांची: झारखंड कांग्रेस में लगातार बढ़ रही खींचतान और खुलकर सामने आ रहे मतभेदों ने पार्टी हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव और कांग्रेस कोटे से सरकार में शामिल मंत्री डॉ. इरफान अंसारी व दीपिका पांडेय सिंह के बीच तीखी तकरार ने स्थिति और बिगाड़ दी है।

सदन के भीतर तीखी बहस और बाहर मीडिया में परस्पर विरोधी बयानबाज़ी ने पार्टी नेतृत्व की नाराज़गी बढ़ा दी है। विपक्ष भी इन आंतरिक विवादों को मुद्दा बनाकर कांग्रेस को घेरने में जुटा है।

स्थानीय स्तर पर मध्यस्थता नाकाम, अब हाईकमान करेगा हस्तक्षेप

सूत्रों के अनुसार, झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सभी पक्षों को साथ बैठाने की कोशिश की, लेकिन विवाद थमने के बजाय और गहरा गया। इसके बाद संगठन में समन्वय की जिम्मेदारी निभाने वाले नेताओं ने स्थिति की रिपोर्ट दिल्ली भेज दी है।

अब पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व खुद हस्तक्षेप करने की तैयारी में है। जल्द ही झारखंड कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को दिल्ली बुलाया जा सकता है, जहां हाईकमान उनकी आपसी शिकायतें सुनेगा और समाधान की दिशा तय करेगा।

चुनावी वर्ष में अनुशासन पर जोर

हाईकमान ने साफ संकेत दिए हैं कि आगामी चुनावी वर्ष में पार्टी किसी भी तरह की सार्वजनिक बयानबाज़ी या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं करेगी। नेतृत्व चाहता है कि झारखंड कांग्रेस पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ 2025 के राजनीतिक माहौल में उतर सके।

गठबंधन की राजनीति में बढ़ सकती है मुश्किलें

झारखंड में कांग्रेस पहले से ही गठबंधन की राजनीति पर निर्भर है। ऐसे में आंतरिक खींचतान पार्टी की स्थिति को कमजोर कर सकती है। नेतृत्व को आशंका है कि अगर विवाद समय रहते नहीं सुलझे, तो इसका सीधा असर कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे और आगामी चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।

फिलहाल नजरें दिल्ली पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि झारखंड कांग्रेस अपने भीतर की खींचतान को कितना और कैसे नियंत्रित कर पाती है।

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