कतरास: महुदा इंटर कॉलेज के मुख्य द्वार पर दो दिनों से आमरण अनशन पर बैठे बर्खास्त शिक्षक सुरेश कुमार रजक और द्वारपाल गौतम कुमार महतो ने कॉलेज के सचिव दीप नारायण शर्मा पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। दोनों का कहना है कि सचिव पद संभालने के बाद से कॉलेज में मनमानी नियुक्तियां, आर्थिक अनियमितता और पारदर्शिता का अभाव बढ़ गया है।
बर्खास्त कर्मियों ने आरोप लगाया कि सचिव ने 1998 से 2014 तक खुद को कॉलेज का कर्मचारी बताकर ईपीएफओ का लाभ लिया, जबकि वह कर्मचारी थे ही नहीं। उन्होंने नियमों की अनदेखी कर अपने बेटे को अकाउंटेंट नियुक्त किया और डिग्री व इग्नू कॉलेज में भी पद संभाल रहे हैं। कई वर्षों से ऑडिट न होने का भी आरोप लगाया गया। दोनों के अनुसार, जब उन्होंने बकाया वेतन और गड़बड़ियों पर आवाज उठाई, तो झूठा अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर उन्हें हटा दिया गया।

“कॉलेज का संचालन विधायक आवास से”—पूर्व छात्र नेता
पूर्व छात्र नेता भोला प्रमाणिक ने कहा कि कॉलेज का संचालन स्थानीय विधायक के आवास से होता है, वहीं बैठकर नियुक्ति और बर्खास्तगी के फैसले लिए जाते हैं। उन्होंने बर्खास्त कर्मियों का समर्थन करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ी
दो दिनों से चल रहे अनशन के दौरान दोनों कर्मियों की तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर शोभा सिन्हा और एएनएम सुनीता देवी ने जांच की। सुरेश रजक का बीपी कम पाया गया और कमजोरी बढ़ी हुई थी, जबकि गौतम महतो को एसिडिटी और चेस्ट पेन की शिकायत रही। डॉक्टरों की सलाह के बावजूद दोनों ने दवा लेने से इनकार कर दिया।

संपर्क की कोशिश नाकाम, पुतला दहन
सचिव दीप नारायण शर्मा और विधायक शत्रुघ्न महतो का पक्ष जानने के लिए किए गए फोन कॉल्स का जवाब नहीं मिला। देर शाम अनशनकारियों और समर्थकों ने सचिव और विधायक का पुतला दहन किया। मौके पर भोला प्रमाणिक, अधिवक्ता निर्मल रवानी सहित कई स्थानीय लोग मौजूद रहे।


