रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सरायकेला-खरसावां जिले के इचागढ़ थाना क्षेत्र में हिरासत में पिटाई के मामले की सुनवाई के दौरान राज्य के डीजीपी को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है और पुलिस हिरासत में होने वाली मारपीट की घटनाएं लगातार बढ़ती चिंता का विषय बन गई हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि हिरासत में पिटाई मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है और पुलिस की जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लग सकती। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की लापरवाही और संवेदनहीनता किसी भी लोकतांत्रिक समाज में स्वीकार्य नहीं है।
पीड़ित को मुआवजा देने पर जल्द आएगा आदेश
हाई कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए संकेत दिया कि पीड़ित को मुआवजा देने संबंधी आदेश जल्द पारित किया जाएगा। अदालत ने कहा कि हिरासत में किसी भी व्यक्ति के साथ की गई क्रूरता न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है।
इचागढ़ केस ने कोर्ट को किया नाराज़
इचागढ़ थाना मामले में एक युवक को पुलिस हिरासत में कथित तौर पर बेरहमी से पीटा गया था। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ा और हाई कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया। न्यायालय ने साफ कहा कि हिरासत में हिंसा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
चैनपुर थाने का मामला भी लटका, कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने याद दिलाया कि गुमला के चैनपुर थाना क्षेत्र में भी इसी तरह का मामला लंबित है। अदालत ने कहा कि बार-बार हो रहीं ये घटनाएं पुलिस तंत्र की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करती हैं। कोर्ट ने पूछा कि जब पहले भी कड़े निर्देश दिए जा चुके हैं, तो फिर ऐसी घटनाएं लगातार क्यों हो रही हैं?
डीजीपी, एसपी और डीएसपी को कोर्ट में किया तलब
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने डीजीपी, सरायकेला के एसपी और डीएसपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। अदालत ने उनसे घटना की विस्तृत जानकारी मांगी और पूछा कि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
हाई कोर्ट का सख्त संदेश
अदालत के रुख से साफ है कि झारखंड में पुलिस हिरासत में होने वाली पिटाई के मामलों पर अब कड़ा रुख अपनाया जाएगा, और न्याय सुनिश्चित करने के लिए कठोर आदेश आने तय हैं।

